अहिंसा से सुख एवं त्याग से शान्ति- मुनि भरतेश सागर

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जैन समाज के महापर्व पर्यूषण पर्व के आठवें दिन जैन मंदिरों में सुरक्षित सामाजिक दूरी के साथ उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। जैन धर्मावलंबियों ने भगवान का अभिषेक संसार के सभी जीवों के कल्याण की भावना को लेकर मंत्रोच्चार द्वारा शांति धारा के साथ किया। इस दौरान कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए भी प्रार्थना की गई। ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से आचार्य विद्यासागर महाराज, साध्वी ज्ञानमती माता जी के आशीष वचनों का श्रवण किया। वहीं अधिकांश लोग मुनि सुधासागर एवं मुनि प्रमाण सागर के निर्देशन में जैन धार्मिक चैनल पारस एवं जिनवाणी पर टीवी के माध्यम से घर बैठकर पूजा अर्चना कर रहे है। तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली अंदावा में विराजमान आचार्य भद्रबाहु सागर महाराज ने बताया कि श्रावक को चार प्रकार का दान करना चाहिए और वह दान सुपात्र को देना चाहिए कुपात्र को नहीं अथार्त दान उन्हें करना चाहिए जो दान के लिए पात्रता रखते हो। दान के भेदों में औषध दान, आहार दान, अभय दान और ज्ञानदान प्रमुख हैं। मुनि भरतेश सागर ने बताया कि अहिंसा से सुख एवं त्याग से शान्ति मिलती है। मनुष्य को अपने जीवन में दान के माध्यम से कुछ न कुछ त्याग अवश्य करना चाहिए। कल 31 अगस्त दिन सोमवार को उत्तम आकिंचन धर्म की पूजा की जायेगी।




