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‘कोई स्कूल नहीं सिखाता हमारी रिस्पेक्ट करना’

इंदौर। ‘मैंने कभी अपने आपको दुनिया से अलग नहीं समझा। मैं भी दूसरों की तरह सामान्य हूं, लेकिन लोगों ने मुझे समझाया कि मैं लोगों से अलग हूं। संविधान ने सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार दिया है, लेकिन समाज ने शायद नहीं। कोई स्कूल नहीं सिखाता कि हमें हर जेंडर को बराबर समझना है, उसकी रिस्पेक्ट करना। हर महिला को अधिकार होना चाहिए, वो जैसे जीना चाहे जी सके। बच्चे को सभी जेंडरों को बराबर समझने की शिक्षा देना जरूरी है।

आपको अपनी लड़ाई खुद लड़ना आनी चाहिए, कोई और आपके लिए नहीं लड़ेगा। सबसे बड़ा दु:ख वही होता है कि आपको किसी का प्यार न मिले और वही दुख किन्न्रों को भुगतना पड़ता है। जीवन में सबसे जरूरी है खुद से प्यार करना, चाहें लोग आपके बारे में कुछ भी सोचें।’ यह बात ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविस्ट रिप्रजेंटेटिव एशिया पेसिफिक, यूएन लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कही। वे एक्रोपॉलिस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा रवींद्र नाट्यगृह में आयोजित टेड एक्स कार्यक्रम में शिरकत के लिए शहर आए थे।

लेखक एवं शिक्षक अरिंदम चौधरी ने कहा भगवान को आज तक किसी ने देखा नहीं, लेकिन 21वीं सदी के मॉडर्न और एडवांस्ड टाइम में भी लोग हर काम के लिए भगवान पर निर्भर रहते हैं। अगर आप जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, सफल होना चाहते हैं तो अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखें।

उन्होंने कहा कि मैं भगवान में विश्वास नहीं करता, किसी धर्म में विश्वास नहीं करता। ये सब चीजें आपकी शक्ति और क्षमताओं को कम करती हैं, इसके माध्यम से आपको कंट्रोल करने का प्रयास किया जाता है। यकीन मानिए आपकी केयर आप स्वयं ही कर सकते हैं कोई और नहीं। हां, धार्मिक किताबों में बहुत सी अच्छी बातें बताई गई हैं, लेकिन लोग उन्हें पढ़ते नहीं सिर्फ रखते हैं। बच्चे कोई भगवान, कोई धर्म नहीं जानते हम उन्हें सिखाते हैं। हम उनके ऊपर अपनी इच्छाएं थोपते हैं।

हाथ पर हाथ रखकर बैठने से नहीं मिलती सफलता

आपको जो काम पसंद हो वो करें, लेकिन उसमें पूरी मेहनत ला दें। हाथ पर हाथ रखकर बैठने से कुछ नहीं होता आपको हमेशा लगे रहना होता है, तभी आप सफल हो सकते हैं। मैं तो आज तक मेहनत कर रहा हूं। मेरा कॅरियर तो 46 साल की उम्र में बना, लेकिन मैंने प्रयास करना नहीं छोड़ा। पहले के मुकाबले आज की फिल्मों, गानों समेत हर चीज की क्वालिटी में कमी आई है, इसीलिए आज की फिल्में या गाने आते हैं और कुछ ही वक्त में गायब हो जाते हैं। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी जैसे सिंगर आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं, लेकिन आज के गायकों में वो बात नहीं है। मिश्रा ने कार्यक्रम में ‘रजिया मेरी जान कविता” के माध्यम से समाज की सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया।

पीयूष मिश्रा, बॉलीवुड एक्टर, गायक, संगीतकार

रिस्क लेना मुझे पसंद है

मैं हमेशा वो ही काम करना पसंद करती हूं, जिसमें रिस्क हो। मैं तब तक उसके पीछे लगी रहती हूं जब तक वो काम पूरा न हो जाए। बचपन से ही आर्मी में जाने की इच्छा थी तो वो पूरी करके ही मानी। कारगिल वॉर के समय भी डटकर अपने पुरुष साथियों का साथ दिया। महिला होकर पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में काम किया। जब कॉर्पोरेट फील्ड में आने का मन हुआ तो बिना कुछ सोचे-समझे नौकरी छोड़कर नई और अनजान फील्ड में काम करने की रिस्क ली।

वंदना शर्मा, मिलिट्री वेटर्न, कारगिल वार, वूमन आइकॉन एशिया पेसिफिक

सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझ कर करें

स्टैंडअप कॉमेडियन विनय मेनन ने जब कॉमेडी के साथ स्पीच की शुरुआत की तो स्टूडेंट्स से भरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि आज ट्रेडिशनल मीडिया की जगह सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन सोशल मीडिया का सही उपयोग करना आना भी जरूरी है। इसके लिए आपको जिम्मेदार होना चाहिए। आज हम सेलिब्रिटी से राय लेते हैं, एक्सपर्ट और एकेडेमिशियन से कम।

विनय मेनन, कॉमेडियन, टीचर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर

रिसर्च पर ध्यान देना चाहिए

जेनिथ वाइपर्स के फाउंडर 18 साल के युवराज भारद्वाज जिन्हंे 2016 में कर्मवीर चक्र प्राप्त हुआ है और वे 2018 के पद्मश्री के लिए नॉमिनेट होने वाले सबसे कम उम्र के हैं। उन्होंने कहा कि हमें स्टीरियोटाइप थिंकिंग से हटकर रिसर्च पर ध्यान देना चाहिए। नए आइडियाज पर काम करना चाहिए। मैं जब कक्षा 7 में था, तभी मैंने रिसर्च वर्क शुरू कर दिया था और एक साल बाद ही मेरा रिसर्च पेपर आ गया था।

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