पुरुषोत्तम मास में दुर्गुणों का त्याग करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है-स्वामी महेशाश्रम

प्रयागराज अरैल स्थित श्री दण्डी स्वामी आश्रम में पूरे मास चलेगा महामृत्युंजय का जप, कीर्तन व देव आराधना का कार्यक्रम
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु के द्वारा प्रकट किया गया परम उत्तम मास है। इस मास में किये गये जप, तप, यज्ञ आदि धार्मिक कार्य और भागवत पुराण, विष्णु पुराण व ब्रह्म पुराण आदि की कथा सुनने से सहस्र गुना फल प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में भगवान नरसिंह की आराधना उत्तम फल देने वाली मानी गयी है। इस मास में अपने दुर्गुणों का त्याग करने से मनुष्य को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह बातें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम महराज ने नैनी के अरैल स्थित श्री दण्डी स्वामी आश्रम में वैदिक ब्राह्मणों और भक्तों को पुरुषोत्तम मास का माहात्म्य बताते हुए कही। उन्होंने बताया कि अधिक मास में अनन्त दान का विधान है। अपने गुरुजनों, संतों और ब्राह्मणों को कांसे की थाली में रखकर मालपुआ, खीर से भरा पात्र, सूती, ऊनी व रेशमी वस्त्र, गुड़, घी और चावल आदि का दान करना चाहिये। इससे अच्छे फल की प्राप्ति होती है। पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति पर चर्चा करते हुए ।शंकराचार्य ने बताया कि जब दैत्यराज हिरणाकश्यप ने ब्रह्मा जी से उनके द्वारा बनाये गये बारह मासों में न मरने का वरदान प्राप्त कर देवताओं, संतों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने लगा तो भगवान विष्णु ने ३६ मास तक दिनों को घटाते-बढ़ाते हुए एक अधिक मास बनाया । जिसमें भगवान नरसिंह के रूप में अवतार लेकर हिरणाकश्यप का बध किया। इसीलिए अधिक मास विष्णु मास के नाम से भी जाना जाता है। स्वामी महेशाश्रम ने बताया कि इस मास में कोई नूतन कार्य करना वर्जित है। इस मास में ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यधिक फलदायी है।
आचार्य नागेश ने बताया कि १६ अक्टूबर तक चलने वाले पुरुषोत्तम मास में पूरे महीने महामृत्युंजय का जप, कीर्तन और देव आराधना का कार्यक्रम चलता रहेगा। शंकराचार्य जी भी १० अक्टूबर तक आश्रम में रहेंगे। भक्तगण आश्रम आकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।


