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भगवती की आराधना करने से जीवन सार्थक हो जाता है- शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी

कुरुक्षेत्र ( अनुराग दर्शन समाचार ) । अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक और नागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा है कि नवरात्रों में मां भगवती की आराधना करने से व्यक्ति का जीवन सार्थक हो जाता है और वह हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहता है। जो श्रद्धालु भक्त श्रद्धा पूर्वक मां भगवती की शरण में आ जाते हैं। उनका कल्याण अवश्य ही निश्चित होता है। प्रथम नवरात्रि के अवसर पर नागेश्वर धाम स्थित मंदिर के प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मां भगवती की आराधना करते हुए स्वामी महेशाश्रम महाराज ने विश्व कल्याण की कामना की और श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि मां दुर्गा की उपासना से सुख संपत्ति और ज्ञान ही नहीं बल्कि कई शक्तियां प्राप्त होती है। जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत मिलती है। वैसे तो हर किसी में हाथ में शक्ति होती है। लेकिन मां दुर्गा यह शक्ति और बढ़ा देती है। इसलिए प्रात: और सांय काल शुद्ध सात्विक मन से मां भगवती के नाम का जाप अवश्य करना चाहिए। स्वामी महेशाश्रम महाराज जी ने कहा कि नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर में मां चंडी देवी स्वयं विराजमान है। जो भक्तों की सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु भक्तों का उद्धार मां चण्डी देवी करती हैं। भक्तों की मां के प्रति अटूट श्रद्धा उनका बेड़ा पार लगाती है। स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा कि मां दुर्गा शांति समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करती है और अंधकार व अज्ञानता रूपी राक्षसों से रक्षा करने वाली परम कल्याणकारी है। नवरात्र में मां की भक्ति का विशेष महत्व है। जो भक्तों को अमोघ फल प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सभ्यता और संस्कार का ज्ञान होना अति आवश्यक है। भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिए सभी को धर्म के प्रति जागृत होना होगा तभी एक सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

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