
इलाहाबाद: फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए देवरिया जेल में बंद बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद ने मंगलवार को अपना नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दाखिल किया. अतीक अहमद के वकील खान शौलत हनीफ ने नामांकन दाखिल किया.
आपको बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर कैंट से बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद का टिकट काट दिया था. पिछले करीब साल भर से बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद जेल में बंद हैं.
जातीय गणित की बात करें तो फूलपुर में यादव के बाद कुर्मी, लोध और कुशवाहा जातियां सबसे अहम हैं. इनमें लोध बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. वहीं, केशव मौर्य की कुशवाहा जाति में अच्छी पकड़ मानी जाती है.
इस सीट पर कांग्रेस ने मनीष मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है. वहीं फूलपुर में बीजेपी प्रत्याशी कौशलेन्द्र सिंह पटेल और कांग्रेस उम्मीदवार मनीष मिश्रा ने आज नामांकन किया. बता दें दोनों ही सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम डॉ केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. इन सीटों पर मतदान 11 मार्च को होगा और मतगणना 14 मार्च को होगी.
दरअसल फूलपुर में शहर उत्तरी और शहर पश्चिमी विधानसभा सीटें जुड़ने के बाद यहां मुस्लिम, पटेल और कायस्थ बिरादगी के सबसे अधिक वोट हो गए हैं. इसके बाद ब्राह्मण और अनुसूचित जाति वोट आते हैं. पटेल मतदाताओं की संख्या करीब सवा दो लाख हैं. मुस्लिम, यादव और कायस्थ मतदाताओं की संख्या भी इसी के आसपास है. वहीं लगभग डेढ़ लाख ब्राह्मण और एक लाख से अधिक अनुसूचित जाति के मतदाता हैं.
बाहुबली अतीक अहमद के मैदान में आने से फूलपुर उपचुनाव का सियासी पारा अभी से ही चढ़ गया है. अतीक अहमद को एक राजनीतिक दल ने खुद समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. अतीक अहमद के समर्थन में एक पार्टी के ऐलान से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गयी हैं. हालांकि फिलहाल न तो अतीक अहमद की पत्नी या उनेक वकील ने इस समर्थन पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है.
कहा जा रहा है कि बाहुबली अतीक अहमद का समर्थन करने वाली राजनीतिक पार्टी कोई और नहीं बल्कि असदुद्दीन ओवैसी की आल इण्डिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानि AIMIM है। पार्टी की इलाहाबाद इकाई की ओर से मंगलवार को ऐलान किया गया कि वह अतीक अहमद को इस उपचुनाव में समर्थन देंगे.
बहारहाल कहा यह भी जा रहा है कि चूंकि अतीक अहमद फूलपुर उपचुनाव में अच्छा-खासा मुस्लिम वोट अपने पाले में कर सकते हैं और AIMIM भी मुस्लिम वोटों की ही राजनीति करती है. ऐसे में उन्हें समर्थन की बात कर ओवैसी की पार्टी अतीक को मिले वोटों में अपनी हिस्सेदारी का ढिंढोरा पीट सकती है.



