सनातन मर्यादा का प्रत्यक्ष प्रमाण भगवान श्री राम। स्वामी महेशाश्रम

( अनुराग शुक्ला ) रादौर ( अनुराग दर्शन समाचार )। श्री दंण्डी स्वामी आश्रम नागेश्वर धाम पक्का घाट रादौर में नौ दिवसीय श्री राम कथा के दुसरे दिन की कथा करते हुए ।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने बताया की महामनिषि तुलसीदास जी ने रामायण की कथा प्रारंभ करते हुए सर्व प्रथम शक्ति और शिव का आराधना किया।
शक्ति श्रधा का स्वरूप एवं भगवान शिव को विस्वास का स्वरूप बताया गया।जब मनुष्य कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए अग्रसर होता है तो उसमें श्रधा और विस्वास का होना ही भक्ति का सात्विक प्रमाण माना गया है शक्ति बुद्धि की संचालिका मानी गईं है जब तक बुद्धि और मन पवित्र नहीं होता तब तक अपने इष्ट पर विस्वास होना असम्भव हैं ।
इस अवसर पर, पं ज्ञान प्रकाश शर्मा, बलबीर बंसल, मनोज रोहिल्ला, कोमल गुप्ता, शशी, कौशल, लिला देवी, शांति, बाला, शरला, आदि, सैकड़ो भक्तों ने कथा का आनन्द लिया



