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धनुष टूटते ही फूटने लगे पटाखे पुष्पवर्षा के बीच सीता ने श्रीराम के गले में डाली वरमाला

( विनय कुमार मिश्रा ) प्रयागराज। रामलीला के मंचन का क्रम बढऩे के साथ उसमें उत्साह, उमंग व रोमांच का भाव प्रकट हो रहा है।

नवरात्र की द्वितीया तिथि पर श्रीकटरा रामलीला कमेटी की रामलीला संपूर्ण रामायण की रामकथा के तहत धनुष भंग का मंचन हुआ। मनोरम मंच पर राजा जनक के आकर्षक दरबार का। जनक की पुत्री सीता शिव धनुष का पूजन करती हैं।

जनक सीता स्वयंवर के लिए शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखते हैं। इस पर अनेक राजा प्रयास करते हैं लेकिन कोई धनुष हिला नहीं पाता।

अंत में गुरु की आज्ञा पर श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे खींच दिया। इससे धनुष टूट गया। धनुष टूटते ही मंच के चारों ओर खुशी में पटाखे फूटने लगे।
राज दरबार में ढोल-नगाड़ा बजाकर खुशी मनाई गई।

पुष्पवर्षा के बीच सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली और नीचे बैठे दर्शकों ने श्रीराम व सीता के ऊपर पुष्पवर्षा करते हुए श्श्रीराम व सीता की जयश् का उद्घोष करके खुशी व्यक्त की। इसकी सूचना अयोध्या नरेश राजा दशरथ को भेजी गई। दशरथ भरत, शत्रुघ्न व अन्य लोगों को लेकर जनकपुर पहुंचे।

वहां श्रीराम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का विवाह सीता व उनकी बहनों से हुआ। मंचन से पहले वरिष्ठ पार्षद आनंद घिल्डियाल, कमेटी के अध्यक्ष सुधीर गुप्त कक्कू, महामंत्री गोपालबाबू जायसवाल, अश्वनी केसरवानी ने मंत्रोच्चार के बीच रामायण का पूजन किया।

वहीं, भारद्वाज आश्रम में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का विधि-विधान से पूजन किया गया।प

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