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१२ रबिउल अव्वल को नहीं निकला जुलूस ए मोहम्मदी

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नबी ए करीम की आमद पर इस वर्ष जुलूसे मोहम्मदी नहीं निकाला गया।घरों पर हरे झण्डे तो लगे लेकिन सड़कों पर जुलूस के साथ निकलने वाले हरे झण्डे लहराते हुए नातख्वाँ नज़र नहीं आए।

खानकाहे अजमली के ११३ साल के इतिहास मे मस्जिदों में मीलाद तो हुआ लेकिन सड़कों पर जुलूस ए मोहम्मदी नहीं निकाला गया

मस्जिदों व घरों मे प्राताकाल से नज़्रो नियाज़ और फातेहाख्वाननी के साथ दुरुद और सलाम हुआ।खानकाहे अजमली में सज्जादा नशीन सै०मो०जर्रार फाखरी की क़यादत में महफिले मीलाद के बाद नायब सज्जादा नशीन अरशद फाखरी ने पैग़मबरे इसलाम मुहम्मद साहब के मुए मुबारक की ज़ियारत कराई वहीं हज़रत बहाउद्दीन नक़शबन्दी के हाँथों से तिनके के सहारे लिखी हुई किताब जिसमे मुजर्रब दुआएँ व नक़्श,तसबीह और हज़रत अली के सर पर पैग़म्बर मोहम्मद साहब द्वारा बाँधे गए अमामे के टुकड़े तथा खिज़्र अलैहिस्सलाम द्वारा भेंट की गई दो तलवारों को जो बरसों से महफूज़ रखे गए है इन सब की ज़ियारत कराई गई।अक़ीदतमन्दों ने अपनी आस्था का मुज़ाहेरा करते हुए सभी ऐतिहासिक चीज़ो की ज़ियारत करते हुए दुआ मांगी।शिया सुन्नी इत्तेहाद कमेटी के सद्र सै०मो०अस्करी ने बताया की सभी तबर्रुकात की ज़ियारत तकरीबन सौ सालों से बराबर कराई जाह रही है।इस वक़्त खानकाहे अजमली के पाँचवीं पीढ़ी के ज़र्रार फाखरी मस्जिद दायरा शाह अजमल के सज्जादानशीन होने के नाते सभी आयोजन उनही की देख रेख मे अनजाम दिए जा रहे है।

ईद मीलादुन नबी पर बाँटी गई मीठाईयाँ

फज़ल फाखरी के नेत्रित्व मे ईद मीलादुन नबी के अवसर पर अक़ीदतमन्दों को दायरा शाह अजमल ढाल पर स्टाल लगा कर मीष्ठान का वितरण किया गया।बड़ी संख्या मे अक़ीदतमन्दों को मिष्ठान वितरण के साथ चाय और बिस्कुट भी तक़सीम किए गए।रागिब हसन,इब्ने हसन,सै०मो०अस्करी,इसमाइल,अकरम,हाजी,आबिद निज़ामी,कमर सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।

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