प्रयागराज के मेजा में पहली बार नीलम करवरिया ने लहराया भाजपा का झंडा

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। प्रयागराज में मेजा विधानसभा 1974 से अस्तित्व में आई। उस समय कोरांव (जो अब विधानसभा है) भी सम्मिलित था। पहली बार हुए 1974 के चुनाव में कांग्रेस के राम देव 19,810 वोट पाकर विजयी हुए थे। जबकि 2017 में भारतीय जनता पार्टी से नीलम करवरिया ने जीत दर्ज कर पहली बार भाजपा का झंडा लहराया। इस बार भी यह सीट भाजपा अपने पाले में करने की कोशिश में जुटी हुई है। इस क्षेत्र के बाहुबली और पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, सपा विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में जेल में बंद हैं। उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने 2017 में उनकी धर्मपत्नी नीलम करवरिया मैदान में उतरी और समाजवादी पार्टी के राम सेवक सिंह को 19,843 वोटों से हराया। उल्लेखनीय है कि, मेजा विधानसभा ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। यहां बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। इस निर्वाचन क्षेत्र में कोई कारखाना नहीं है, क्योंकि 60 फीसदी क्षेत्र पहाड़ी है। ब्राह्मण बाहुल्य होने के चलते इस सीट पर उनकी भूमिका निर्णायक होती है। इस संसदीय क्षेत्र से सांसद रीता बहुगुणा जोशी हैं, जो भारतीय जनता पार्टी से हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राजेन्द्र सिंह पटेल को हराया था। मेजा विधानसभा में 2017 में कुल 3,09,428 मतदाता थे, जबकि 2022 में 15,361 से बढ़कर 3,24,789 मतदाता हो गये हैं।
*एक नजर हुए चुनाव पर*
वर्ष 1974 के बाद 1977 में जेएनपी से जवाहर लाल 23,202 मत पाकर विजय हासिल किये। 1980 में कांग्रेस से विश्राम दास, 1985 में पुनः विश्राम दास विधायक बने। इसके बाद से मेजा विधानसभा की सीट कांग्रेस के हाथ से चली गई। 1989 और 1991 में जेडी से विश्राम दास दो बार पुनः विधायक बने। 1993 में बसपा का पहली बार कब्जा हुआ, जब राजबली जैसल 41,676 वोट पाकर विजयी हुए। 1996 और 2002 में राम कृपाल दो बार विधायक हुए। 2007 में राजबली जैसल पुनः बसपा से चुने गये। 2012 में सपा का खाता खुला और गामा पाण्डेय 44,823 मत पाकर विजयी हुए। इसी के बाद 2017 में पहली बार भाजपा का खाता नीलम करवरिया से खुला, जिसमें 67,807 वोट पाकर वह विजयी हुई।




