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देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा हैं ऐसे में हजार करोड़ से नये संसद भवन की क्या जरूरत-रेवती रमण सिंह

चुनाव,जनसभा, माघमेला हो सकता हैं तो संसद का शीतकालीन सत्र क्यों नहीं।

नये संसद भवन में भी सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य व अशोक लाट का निर्माण हो

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने कोरोना महामारी, आर्थिक मंदी और किसान आंदोलन के बीच नये संसद भवन के शिलान्यास पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संकट के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आगे बढा़ने के औचित्य पर सवाल खड़े किया ।और कहा कि जब देश के लाखों प्रवासी मजदूर छोटे छोटे बच्चों के सैकड़ों किमी पैदल भूखे प्यासे सड़क पर चल रहे थे । तो मोदी सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं किया पर उस समय उन्होंने अपने यात्रा के लिए 8458 करोड़ रुपए से दो नये बोईंग विमान खरीदें अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह के विमान मे यात्रा करते हैं ।उन्होंने कहा कि गरीब देश के प्रधानमंत्री को सम्पन्न देश के राष्ट्रपति कि बराबरी नहीं करनी चाहिए यह भारत के गरीब मजदूर की अहवेलना हैं । कि खुद के लिए स्पेशल जहाज और गरीब के लिए पैदल सड़कों पर घिसने के लिए छोड़ दिया उन्होंने कहा कि जब देश की आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाती तो ऐसे प्रोजेक्ट को आगे बढा़ना चाहिए था।
सासंद ने शीतकालीन सत्र नहीं होने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्रीय संसदीय मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष को लिखे पत्र के अनुसार सरकार कोरोना संकट के कारण शीतकालीन सत्र नहीं करने जा रही हैं जो सही नहीं है ।उन्होंने कहा कि नई कृषि नीति के खिलाफ धरना दे रहे किसानों की आवाज संसद मे ना गूंजें और सरकार की खिचाई से बचने का तरीका है।उन्होंने कहा कि जब चुनाव हो सकते हैं जनसभा हो सकती हैं माघमेला हो सकता है तो कोरोना संकट के बहाने शीतकालीन सत्र को ही स्थगित करना गलत है यह लोकतंत्र के लिए गलत संदेश है कि तानाशाही मे आप निर्णय ले लो और जब उसका विरोध हो तो संसद में जबाब देने से बचने के लिए सदन को ही ना चलायें।

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