संस्कृत विभाग द्वारा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में श्रीमदभगवद्गीता की पर एक दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान
आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में श्रीमदभगवद्गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान
आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में कियायोग संस्थान झूसी, प्रयागराज
के सत्यम योगी जी ने कहा कि गीता के सिद्धान्तों को जीवन में उतारना ही क्रियायोग है। कर्म में एकाग्रता आने पर ही फल की इच्छा नहीं होती और निष्काम
कर्म की साधना सफल होती है। गीता के संदेश को क्रियायोग द्वारा ही जीवन में उतारा जा सकता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ज्योतिष विभाग के प्रो0 गिरजा शंकर शास्त्री जी ने कहा कि सम्पूर्ण गीता श्री कृष्ण के स्वरूप में दृष्टिगोचर होती है गीता सम्पूर्ण विश्व के लिए कल्पवृक्ष है। विशिष्ट
अतिथि के रूप में प्रो० हरिराम मिश्र, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कहा कि
गीता सभी उपनिषदों का सार है। उन्होंने कहा कि आहार-विहार की शुद्धि होने से मानव-मन की शुद्धि होती है। अध्यक्षीय भाषण के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय
के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो0 उमाकान्त यादव जी ने कहा कि गीता कालजयी ग्रन्थ है। मनुष्य के जीवन का उत्कर्ष गीता के ज्ञान द्वारा ही सम्भव है। गीता किसी एक धर्म का नहीं अपितु सम्पूर्ण मानव धर्म का गन्ध है। उन्होंने कहा कि गीता में युक्त
आहार-विहार पर बल दिया गया है। सात्विक भोजन से मनुष्य का मन स्वस्थ होता है । और मन स्वस्थ होने से जीवन स्वस्थ होता है। विषय को व्याख्यायित करते हुए शासी निकाय के अध्यक्ष श्री पंकज जायसवाल ने अपने उदबोधन में वैदिक पंच
महायज्ञों की जीवन में अनिवार्यता को बतलाते हुए विषय का उपस्थापन किया।
अतिथियों का स्वागत प्राचार्या डॉ० रमा सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉo निशा खन्ना ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ० सोनमती पटेल ने किया। डॉ० पुष्पलता अग्रवाल, डॉ0 ममता गुप्ता, डॉ0 कल्पना वर्मा, डॉ० मधुरिमा, डॉ0 दीपशिखा,
डॉ0 ज्योति रानी के सहयोग से कार्यक्रम सफल हुआ।


