वात्सल्य में पली लाडली ’पालकी में हुई विदा’

वृंदावन के अनाथालय के पालने में पली बच्ची को दीदी मां के वात्सल्य में मिली छांव
(अनुराग शुक्ला )
मथुरा (अनुराग दर्शन समाचार )। वृंदावन के अनाथालय के पालने में पली बच्ची को दीदी मां के वात्सल्य की ऐसी छांव मिली कि आज वह उसी वात्सल्यग्राम से पालकी में बैठकर विदा हो रही है। पच्चीस साल पहले वात्सल्यग्राम के पालने में किसी अभागी ने अपनी कोख से जन्मी महज एक दिन की बालिका को उसके भाग्य भरोसे छोड़ दिया। लेकिन बच्ची के अभाग्य को सौभाग्य में बदल दिया वात्सल्यग्राम की अधिष्ठात्री साध्वी ऋतंभरा के वात्सल्य ने,पच्चीस साल पहले खून के सम्बन्धो को खो चुकी ऋचा आज भावमयी सम्बन्धो के सहारे पालकी पर सवार होकर अपने सपनो के राजकुमार के साथ इंदौर विदा हो गयी। अपनो द्वारा ठुकराये गये मासूमो के बीच दीदी माँ के रूप में प्रसिद्ध साध्वी ऋतंभरा के वात्सल्यमयी सानिध्य में न केवल बच्चो का पालन पोषण किया जाता है।बल्कि उन्हें समाज के साथ कदमताल करने के गुर भी सिखाये जाते है। इसी तरह ऋचा को उच्च शिक्षित कर उसे कानून की डिग्री दिलाने तक के हर सफर में वात्सल्यग्राम का साथ मिला। और अब हर आम लड़की की तरह ऋचा भी अपने परिवार को सवांरने इंदौर रवाना हो गयी। इस वैवाहिक समारोह में हिन्दू रीतिरिवाज के मुताबिक एक परिवार में होने वाली सभी रस्मो को उल्लास के साथ निभाया गया।चाहे मेहंदी हो या हल्दी,हर रस्म में दीदी माँ का वात्सल्य हर क्षण ऋचा के साथ दिखाई दिया।




