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दिवंगत वीरब्रती ब्रह्मचारी स्वामी प्रबल जी महाराज का हुआ अन्तिम संस्कार

प्रयागराज। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य वीरब्रती ब्रह्मचारी स्वामी प्रबल जी महाराज का बिगत 40 वर्षों से अनवरत सैकड़ों की संख्या में यज्ञ, महायज्ञ, लक्षचण्डी, सतमुख कोटि होमात्मक महायज्ञों का समायोजन कराकर पूरे देश में यज्ञमय वातावरण निर्माण करने में अहम् योगदान रहा | धर्म संघ, रामराज्य परिषद्, माघ मेला हो या कुम्भ मेला, धर्म संघ का शिविर लगाकर अखण्ड अन्न क्षेत्र व यज्ञ-महायज्ञ कर धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के आदेशों, निर्देशों का सतत् पालन करते रहे |

स्वामी प्रबल जी महाराज का अन्तिम संस्कार उनके उत्तराधिकारी गुणप्रकाश ब्रह्मचारी एवम् त्रयम्बक चैतन्य ब्रह्मचारी द्वारा वैदिक विधि विधान के साथ किया गया, घर्म संघ भादरा के प्रधानाचार्य सहित काशी के अग्निहोत्री बलराम पाण्डेय जी ने कर्म काण्ड की प्रक्रिया को सम्पन्न कराया |


श्रध्दाञ्जलि व अन्तिम यात्रा में प्रमुख रूप से श्री काशी सुमेरु पीठाधाश्वर यति सम्राट अनन्त श्री विभूषित जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज, धर्म संघ के सचिव श्री जगजीतन पाण्डेय, बटुक चैतन्य ब्रह्मचारी, स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती, अनन्त विज्ञान मठ के महन्त स्वामी इन्द्र प्रकाश आश्रम, काशी विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष प्रो0 राम यत्न शुक्ल, श्री राम नारायण द्विवेदी, महानिर्वाणी के महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज, गीताप्रेस के सम्पादक श्री राधे श्याम खेमका, श्री पंच दशनाम उदासीन अखाड़ा के स्वामी आत्मानन्द जी महाराज, सिद्धपीठ भूमा निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ जी महाराज, धर्म संघ नई दिल्ली के स्वामी इन्द्र स्वरूप आश्रम जी महाराज, धर्म संघ लुधियाना के स्वामी देवी स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज सहित सैकड़ों सन्तों, महन्तों ने पुष्प अर्पित किया, और अन्तिम यात्रा में साथ रहे |


अन्तिम यात्रा धर्म संघ शिक्षा मंडल दुर्गा कुण्ड से बैण्ड बाजा, संखध्वनि, डमरू आदि वैदिक वाद्यों के साथ रविन्द्रपुरी, शिवाला होते हुए हरिश्चन्द्र घाट पहुँची, जहाँ चन्दन की लकड़ी में अग्नि संस्कार किया गया |

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