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जयंती विशेष: भक्ति धारा के महान संत थे स्वामी जगद्गुरु रामानंदाचार्य

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । स्वामी रामानंदाचार्य वैष्णो भक्ति धारा के महान संत थे। रामानंद अर्थात रामानंदाचार्य ने हिंदू धर्म को संगठित और व्यवस्थित करने के अथक प्रयास किए, उन्होंने वैष्णव संप्रदाय को पुनर्गठित किया तथा वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया। सोचिये जिनके शिष्य संत कबीर और रविदास जैसे संत रहे हो तो वह कितने महान रहे होंगे। बादशाह गयासुद्दीन तुगलक ने हिंदू जनता और साधुओं पर हर तरह की पाबंदी लगा रखी थी। हिंदुओं पर बेवजह के कई नियम तथा बंधन थोपे जाते थे। इन सब से छुटकारा दिलाने के लिए रामानंद ने बादशाह को योग बल के माध्यम से मजबूर कर दिया। अंततः बादशाह ने हिंदुओं पर अत्याचार करना बंद कर उन्हें अपने धार्मिक उत्सवों को मनाने तथा हिंदू तरीके से रहने की छूट दे दी। प्रयागराज में माघ माह की सप्तमी संवत 1356 अर्थात सन 1310 को कान्यकुब्ज ब्राह्मण कुल में जन्मे रामानंद जी के पिता का नाम पुण्य शर्मा था तथा माता का नाम सुशीला देवी था। वशिष्ठ गोत्र का होने के कारण वाराणसी के कुल पुरोहित ने मान्यता अनुसार जन्म से तीन वर्ष तक उन्हें घर से बाहर नहीं निकालने और एक वर्ष तक आईना नहीं दिखाने को कहा था। आठ वर्ष की उम्र में उपनयन संस्कार होने के पश्चात उन्होंने वाराणसी पंचगंगा घाट के स्वामी राघवानंद आचार्य जी से दीक्षा प्राप्त की। तपस्या तथा ज्ञानार्जन के बाद बड़े-बड़े साधु तथा विद्वानों पर उनके ज्ञान का प्रभाव दिखने लगा। इस कारण मुख्य लोग अपनी तृष्णा शांत करने के लिए उनके पास आने लगे। प्रमुख स्वामी रामानंदाचार्य जी के कुल में 12 प्रमुख शिष्य थे। पहला संत अनंतानंद दूसरा संत सुखानंद तीसरा सुरानंद चौथा नरहरी आनंद पांचवैन योगानंद छठवां पिप आनंद सातवां संत कबीर दास आठवां संत सजा महा नौवां संत धन्ना दसवां संत रविदास रामावती और 12 संत सुरसरि। संवत 1532 अर्थात सन 1476 में जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी ने अपनी देह छोड़ दी। उनके देह त्याग के बाद से वैष्णो पंक्तियों में जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर रामानंदाचार्य की पदवी को आसीन किया जाने लगा, जैसे शंकराचार्य एक उपाधि है उसी तरह रामानंदाचार्य की गाड़ी पर बैठने वाले को इसी उपाधि से विभूषित किया जाता है। स्वामी श्री नरहरि आचार्य पीठ के पीठाधीश्वर पद पर आसीन स्वामी राम सुभग देवाचार्य विनयका बाबा वैष्णो अखाड़ा ने चार फरवरी को जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी भगवान की जयंती के अवसर पर खाक चौक व्यवस्था समिति के तत्वाधान में होने वाले कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया है।

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