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गंगा स्नान से जन्म जन्मांतर के पापों का शमन होता है- शंकराचार्य महेशाश्रम

(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माघ मेला क्षेत्र के दण्डी नगर नागेश्वर धाम के शिविर में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक शंकराचार्य श्री महेशाश्रम जीने आज हमारे संवाददाता को बताया प्रयाग में लगने वाले माघ मेला का वास्तविक मूल्य क्या है । मेला धर्म, संस्कृति और आध्यात्म का संगम है, जिसमें एक ही स्थान पर सारे विश्व से बिना किसी निमंत्रण के सनातन हिंदू धर्मावलंबी मोक्ष की कामना कर गंगा स्नान करने के लिए आता है। स्वामी महेशाश्रम ने कहा प्रयागराज के संगम में एक ऐसी शक्ति समाहित है । जो युगों-युगों से हिंदुओं को आध्यात्म से जोड़ने के लिए सेतु का कार्य करते हैं। गंगा स्नान से जन्म जन्मांतर के पापों का शमन होता है। शंकराचार्य महेशाश्रम ने बताया माघ मेला एक ईश्वरीय निमंत्रण है, जिसमें श्रद्धालु भक्तजन गंगा में स्नान कर शामिल होकर स्वयं को भाग्यशाली समझता है। संयासियो की दीक्षा, महंतों, महामंडलेश्वरों का पट्टाभिषेक माघपर्व को संन्यास परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर बनता है। इस प्रकार मेला सनातन हिंदू धर्म का महान, विशाल पर्व है। सनातन हिंदू धर्म की आस्था, मन्यताओं का प्रतिबिंब है। बसंत पंचमी को संगम स्नान होगा। संत महात्मा से लेकर श्रद्धालुओं को इसका बेसब्री से इंतजार है। संतों के आशीर्वाद से दिव्य और भव्य ही नहीं बल्कि पारंपरिक स्वरूप में होगा।

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