मृत्यु इस जीवन का सत्य है इस जीवन को यूँ ही न गवाएं अपने सत्कर्मो को इतना बढा़ ले की आपको मोक्ष की प्राप्ति हो जाए।श्रीस्वामी घनश्यामाचार्य

( आनंत पांडे )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। क्षेत्र के उचेहरा में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ पर विराजमान अलोपीबाग प्रयागराज से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज ने द्वितीय दिवस की कथा में पितामह भीष्म के प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि आज के परिवेश में अगर विचार किया जाए तो पितामह भीष्म बाणों की शैया मैं 6 महीने तक लेटे रहे आज जो बालक अपने बूढ़े बाप को अनाथ आश्रम भेज देता है उस पिता को भी जब तक वह जीता है उसे बाणों की शैया जैसा ही कष्ट मिलता है । पूज्य स्वामी जी ने बताया कि पिता बरगद की छांव की तरह है हम उस पिता को अपने से अलग कर देते हैं जिस पिता ने अपने जीवन का हर क्षण आपको प्रदान कर आपको यहां तक पहुंचाया है महाराज श्री ने बताया की जो फल बड़े बड़े तप यज्ञ हवन से नहीं मिलता है वो फल आपको भगवान की कथा सुनने उनका नाम स्मरण करने से प्राप्त हो जाता है जो जीव अपने लक्ष्य को याद रखता है वही सर्व श्रेष्ठ है हमें ये मानव जीवन क्यों मिला है किस उद्देश्य के लिए मिला है इसे जरूर ध्यान रखें जब तक आप इस मानव जीवन में अपने उद्देश्य को प्राप्त न कर लें तब तक उसके लिए मनोरथ करते रहें क्यूंकि जीवन की यात्रा में अंत मृत्यु है और मृत्यु इस जीवन का सत्य है इसलिए इस जीवन को यूँ ही न गवाएं और अपने सत्कर्मो को इतना बढा़ ले की आपको मोक्ष की प्राप्ति हो जाए ।
पूज्य महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि भागवत वही अमर कथा है जो भगवान शिव जी ने माता पार्वती जी को सुनाई लेकिन मध्य में पार्वती जी को निद्रा आ गई और वो कथा शुक अर्थात तोते ने पूरी सुनली यह भी पूर्व जन्मों के पाप का प्रभाव होता है कि कथा कि बीच में छूट जाती है भगवान की कथा मन से नही सुनने के कारण ही जीवन में पूरी तरह से धार्मिकता नहीं आ पाती है। जीवन में श्याम नहीं हो तो आराम नहीं। भगवान को अपना परिवार मानकर उनकी लिलाओ मे रमना चाहिए। गोविन्द के गीत गाए बिना शान्ति नहीं मिलेंगी । अतः शांति चाहिए तो भजन करें । कथा पर मुख्य यजमान बैकुंठवासी राधिका प्रसाद द्विवेदी (पुराणिक जी) बैकुंठ वासी बालमुकुंद द्विवेदी अरुण अनिल द्विवेदी के साथ समस्त श्रोता गण भी कथा सुनकर भावविभोर हुए ।



