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आज राष्ट्रीय जन समर्थन पार्टी के तत्वावधान में जिला कार्यालय पर राष्ट्र संत बाबा गाडगे का 64वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज संत गाडगे बाबा के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए जिलाध्यक्ष इंजीनियर राम बहादुर जी ने कहा कि संत गाडगे बाबा मानवता व स्वच्छता के अग्रदूत हैं और वह राष्ट्र सेवक व संत है। गाडगे महाराज एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे।

संत गाडगे लोगों को जानवरों पर अत्याचार करने से रोकते थे। वे समाज में चल रही जातिभेद और रंगभेद की भावना को नहीं मानते थे। वे लोगो को कठिन परिश्रम, साधारण जीवन और परोपकार की भावना का पाठ पढ़ाया करते थे और हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करने को कहते थे। उन्होंने अपनी पत्नी और अपने बच्चों को भी इसी राह पर चलने को कहा। वह अपना ट्रेडमार्क झाड़ू लेकर चलते थे और टोपी पहनते थे। जब भी वह किसी गाँव में पहुँचते थे तो वह गाँव की नालियाँ और सड़कें साफ करते थे और अगर ग्रामीणों द्वारा पैसा दिया जाता है, तो वह इसका इस्तेमाल समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए करते थे। गाडगे महाराज ने कई शैक्षणिक संस्थानों, धर्मशालाओं, अस्पतालों और पशु आश्रयों को प्राप्त धन के साथ शुरू किया था। उन्होंने कीर्तन के रूप में कक्षाएं संचालित कीं। उन्होंने लोगों से सरल जीवन जीने, धार्मिक उद्देश्यों के लिए पशु वध को रोकने और शराब के खिलाफ अभियान चलाने का अनुरोध किया। उन्होंने गरीबों को कड़ी मेहनत, सरल जीवन और निस्वार्थ सेवा का उपदेश दिया। 20 दिसंबर, 1956 को अमरावती जाते समय उनका परिनिर्वाण हो गया था।
राम बहादुर जी ने सरकार से संत गाडग़े को भारत रत्न दिए जाने की मांग की साथ ही गाडग़े को स्वच्छता का प्रतीक घोषित करने, गाडग़े जयंती को स्वच्छता दिवस घोषित करने, उनके परिनिर्वाण दिवस 20 दिसंबर को राजकीय अवकाश घोषित करने, गाडग़े के जीवन को पाठयक्रम में शामिल करने, गाडगे के नाम से सरकारी भवनों का नामकरण करने, संत गाडगे धोबी कल्याण बोर्ड का गठन करने और एक रेल संत गाडगे के नाम सेे संचालित करने की मांग की। इस अवसर पर राष्ट्रीय जन समर्थन पार्टी,अधिवक्ता सभा के जिलाध्यक्ष एडवोकेट चंद्र प्रकाश निगम, जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र चौधरी, अशोक चौधरी, महासचिव अनुज पाल, रामबरन, आशीष कनौजिया, अंकित कनौजिया, प्रियांशु आर्य, राजपाल, वीरेंद्र कुमार रावत, राम मूरत सरोज, रीता सिंह, सुरेश बहादुर, विपिन सरोज, यश कुमार आदि मौजूद रहे।

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