न मंदिरों में भक्तों की चहल-पहल न मइया का जयकारा गूंज रहा, लॉकडाउन लगने से मंदिरों में पचरा सन्नाटा।

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। चैत्र नवरात्र में जिन देवी मंदिरों में सूर्योदय होते ही श्रद्धालुओं का जमघट लग जाता था।

हाथों में पूजा की टोकरी, चेहरे पर मास्क लगाए, हर कोई मइया के दर्शन-पूजन को लालायित रहता था। घंटा व शंख की कर्णप्रिय ध्वनि के बीच आरती लेने की होड़ लगी होती थी। आज वहां रविवार को सन्नाटा पसरा था । न मंदिरों में भक्तों की चहल-पहल है, न मइया का जयकारा गूंज रहा है। सिर्फ मंदिर के पुजारी परंपरा के अनुरूप पूजन व दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं। वहीं, भक्त अपने-अपने घरों में संयम के साथ साधना में लीन हैं।
*लॉकडाउन में प्रयागराज के मंदिर बंद हैं।*
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। लॉकडाउन के कारण रविवार को मां अलोपशंकरी, मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी, मां खेमा मायी, मां कालीबाड़ी सहित समस्त देवी मंदिर बंद हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया है। वहीं, श्रद्धालु भी घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वो घर पर ही मां दुर्गा के छठें स्वरूप कात्यायनी का पूजन करने में लीन हैं। कलश स्थल पर दीप जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। मां को फल, पुष्प व मिष्ठान अर्पित किया। व्रती महिलाओं ने शारीरिक दूरी मानक का पालन करते हुए घर में भजन-कीर्तन के जरिए उनसे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व भौतिक कष्टों से मुक्ति पाने की कामना की। लॉकडाउन के कारण देवी मंदिर रविवार को भले नहीं खुले लेकिन देवी मां का पूजन व श्रृंगार परंपरा के अनुसार किया गया। माँ अलोपशंकरी मां कल्याणी देवी, मां ललिता देवी व मां खेमा मायी का मंत्रोच्चार के बीच मइया के कात्यायनी स्वरूप का रत्नजडि़त आभूषणों से श्रृंगार करके पूजन किया गया। पुजारियों ने मइया की आरती उतारकर जनकल्याण की कामना की। हर मंदिर में शतचंडी यज्ञ भी जारी है। मंदिर के पुजारी व प्रबंधन से जुड़े लोगों ने यज्ञकुंड में आहुतियां डालीं।




