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मां विंध्यवासिनी मंदिर के दान पात्रों से जहां-जहां रुपया लगाया गया हो वहाँ विंध्य विकास परिषद का बोर्ड लगाया जाए

(सुमित पांडे) विंध्याचल मिर्जापुर (अनुराग दर्शन समाचार)। विंध्याचल मंदिर की देखरेख के लिए और उसकी व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय पंडा द्वारा विंध्याचल के समाजसेवी लालचंद पांडेय जी सरकारी करमचारी हैं। और दूरसंचार में काम करते हुए इन्होंने अपना व्यस्त समय निकाल कर श्री विंध्य पंडा समाज का स्थापना सन 19 53 मे किया।

कुछ अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से इस पैसे का दुरुपयोग कर रहे है

कुछ समय बीतने के बाद इन्हें लगा की सरकारी नियंत्रण भी होना चाहिए तब इन्होंने सन 1982 मे विंध्य विकास परिषद का गठन किया जिसके अध्यक्ष जिलाधिकारी मिर्जापुर,सचिव नगर मजिस्ट्रेट मिर्जापुर ईओ नगर पालिका एस ओ विंध्याचल पंडा भाई को मिलाकर इस संस्था का गठन हुआ । संस्था का कार्य मां विंध्यवासिनी मंदिर पर लगे दान पात्रों से पैसा निकाल कर मंदिर के साथ-साथ विंध्याचल नगर का विकास करने का जिम्मेदारी परिषद को दिया गया । मगर कुछ अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से इस पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है जैसे शास्त्री गंगा पुल मिर्जापुर अटल चौराहा अमरावती पर लाखों लाख रुपय खर्च कर दिया गया । सोना चांदी को सब पीली धातु व सफेद धातु में परिवर्तन कर दिया गया। वर्तमान में भक्तों के दिए गए दान को कहां खर्च करते हैं । किस मध्य में खर्च करते हैं । यह पार्षदों को नहीं बताते। आज पार्षद पंडित तेज बहादुर तेजनगिरी ने माननीय जिलाधिकारी विंध्य विकास परिषद सचिव नगर मजिस्ट्रेट से मांग करता हूं की मां विंध्यवासिनी मंदिर के दान पात्रों से जहां-जहां रुपया लगाया गया हो वहां तुरंत विंध्य विकास परिषद का बोर्ड लगाया जाए। जिससे लोगों को पता चले की पैसा कहां से लगा कुछ राजनीति पार्टियां अपना बोट लगाकर श्रेया ले रही है ।वही मां विंध्यवासिनी मंदिर का सिर्डी का ग्रेनाइट टूट गया है। इसको तुरंत बनवाने की कृपा करें । स्थानीय पंडा समाज जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों से यह मांग करता है।की मंदिर के दान पेटी में आए हुए दान का खर्च का हिसाब दे ।और मंदिरों में जहां-जहां टूटते हैं ।उसको बनवाने के साथ मंदिर की सुधार व्यवस्था की जाए जिससे आने वाले भक्तगण अपने आप को असुरक्षित न महसूस करें।

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