
बता दें अखिलेश सरकार में आजम खान जल निगम विभाग के मंत्री थे. उस दौरान उनके विभाग में 1300 पदों पर भर्तियां हुई थीं. इन भर्तियों में उनके उपर करप्शन के आरोप लगे हैं. हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों पर आजम खान ने कहा था बीजेपी उनके दामन पर दाग लगाना चाहती है.
जानकारी के अनुसार, एसआइटी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री आजमखान व जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसूदानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है. बता दें कि आजम खान अखिलेश सरकार में जल निगम के अध्यक्ष थे. अपनी रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा है कि आजम के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई आरोपों के पर्याप्त सबूत हैं. एसआईटी इंचार्ज आलोक प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अभियोग चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. सरकार से अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अब तक हुई है ये कार्रवाई
इस मामले में 122 असिस्टेंट इंजीनियर को सरकार बर्खास्त कर चुकी है. इससे पहले 22 सितंबर को एसआईटी का जल निगम के हेडक्वार्टर पर छापा पड़ा था. 5 दिसंबर को तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी से पूछताछ हुई थी. अब तक इस मामले में 8 अफसरों के बयान एसआईटी दर्ज कर चुकी है.
इन पदों पर हुई थी भर्तियां
सहायक अभियंता- 122 अवर अभियंता- 853 नैतिक लिपिक – 335 आशुलिपिक- 32 समेत 1300 पदों पर भर्तियां की गई थीं. भर्ती के लिए वित्त विभाग से अनुमति भी नहीं ली गई थी. सरकार के बजाय जला निगम के चेयरमैन के स्तर पर ही भर्ती को मंजूरी दे दी गई थी. जांच में एसआईटी को भर्ती आदेश पर आजम खान के हस्ताक्षर मिले हैं. योगी सरकार इस मामले में 122 सहायक अभियंताओं को पहले ही बर्खास्त कर चुकी है. शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि भर्ती के दौरान नियमों को दरकिनार करते हुए गलत नियुक्तियां की गईं.
वहीं, बीजेपी की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अखिलेश के कार्यकाल में हुई हर सरकारी विभाग की भर्तियों की जांच कराएंगे. जल निगम में हुई भर्तियों की जांच बीते सितंबर महीने में एसआईटी को दी गई थी. इस मामले में अब तक पूर्व नगर विकास सचिव एसपी सिंह के बयान भी दर्ज हो चुके हैं. आईएएस एसपी सिंह अब रिटायर हो चुके हैं. वहीं आजम खान के ओएसडी रहे आफाक भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं.


