कैराना उपचुनाव: हुकुम सिंह और मुनव्वर हसन एक ही परिवार के वंशज

इलाहाबाद। कैराना लोकसभा उपचुनाव के लिए विसात सज चुकी है. बीजेपी की तरफ से मृगांका सिंह तो सपा और रालोद की संयुक्त प्रत्याशी तबस्सुम हसन मैदान में हैं. इतना ही नहीं तबस्सुम हसन के देवर कुंवर हसन भी निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं. लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी कि स्वर्गीय हुकुम सिंह का परिवार व हसन एक ही परिवार के वंशज है. इतना ही नहीं वर्षों से दोनों परिवारों में रिश्ता भी बना हुआ है.
दरअसल, कैराना के ये दोनों परिवार इलाके की राजनीति में अहम भूमिका निभाते है. दोनों परिवार बाबा कलसा के वंशज है, जो काफी समय पहले हिंदू-मुस्लिम में बंट गए थे. पूर्वज बाबा कलसा से ही इन्हें कल्सयान खाप की उपाधि मिली. बाबा कलसा के एक बेटा था, जिसका नाम था मान सिंह. मान सिंह के समय से ही परिवार दो जगह बंट गए. एक परिवार मुस्लिम समुदाय में बंटा तो दूसरा परिवार हिंदू ही रह गया. जिसके बाद मानसिंह के परिवार में मुख्तार सिंह के रूप में बेटे ने जन्म लिया. जिसके दो लड़के थे. जिनका नाम रामपाल सिंह है और दूसरे बेटे का नाम हुकुम सिंह था. इसी साल 3 फ़रवरी को हुकुम सिंह का लंबी बीमारी के चलते देहांत हो गया.
अगर हसन परिवार की बात की जाए तो हसन परिवार की शुरुआत अख्तर हसन से हुई. अख्तर हसन के पांच बेटों हुए. पहले बेटा मुनव्वर हसन, अरशद हसन, कवंर हसन, अनवर हसन और सरवर हसन. जिसके बाद मनव्वर हसन परिवार में एक बेटा और एक बेटी का जन्म हुआ. बेटा नाहिद हसन व बेटी का नाम इकरा है. नाहिद हसन कैराना विधानसभा पर वर्तमान में विधायक है. नाहिद हसन ने 2017 के चुनाव मे बीजेपी प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराया था.
हालांकि अगर इनके परिवारिक नातों की बात की जाए तो नाहिद हसन, बाबू हुकुम सिंह के परपौत्र लगते है और मृगांका नाहिद हसन की बुआ लगती हैं. हालांकि राजनीति में दोनों परिवार एक दूसरे के कट्टर हैं. लेकिन परिवारिक रिश्तों को भी बखूबी निभाते हैं. आज भी दोनों परिवार शादी समारोह और गमी में एक दूसरे के घर आते जाते हैं.
हुकुम के चौपाल और हसन के चबूतरे पर तय होती है रणनीति
शामली के कैराना में हिंदू गुर्जरों की कलस्यान चौपाल और मुस्लिम गुर्जरों का चबूतरा, इन्हीं दो स्थानो के इर्द-गिर्द सियासत घूमती रही है. सियासत एक बार फिर इतिहास को दोहरा रही है. कैराना की राजनीति के धुर विरोधी हुकुम सिंह और मुनव्वर हसन जब आमने-सामने होते थे, तो चौपाल और चबूतरा पर ही सारी रणनीति तय की जाती थी. इस बार इन्हीं दोनों परिवार की महिलाएं चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं. चुनाव तो दो जिलों की पांच विधान सभाओं में लड़ा जाएगा, लेकिन चुनाव का वॉर रूम चौपाल और चबूतरा ही होंगे. कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी की तरफ से मृगांका सिंह प्रत्याशी हैं, तो गठबंधन की तरफ से तबस्सुम हसन प्रत्याशी घोषित हो चुकी हैं. तबस्सुम हसन कैराना लोकसभा सीट से रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगी. खास बात यह भी है कि मृगांका सिंह अपनी राजनीतिक सफर का दूसरा चुनाव लड़ रही हैं और हसन परिवार से तबस्सुम हसन भी दूसरी बार लोकसभा के उपचुनाव में उतरी हैं. दोनों ही महिलाओं को राजनीतिक समझ विरासत में मिली है.
वर्षों से दोनों ही परिवारों का कैराना सीट पर रहा है दबदबा
मृगांका सिंह के पिता स्वर्गीय बाबू हुकुम सिंह कैराना विधानसभा सीट से सात बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए. वह 1985 में कांग्रेस की प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे. बाद में बीजेपी में आने पर राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में मंत्री रहे और फिर विधानमंडल दल के उपनेता और नेता भी रहे.
नाहिद हसन
तबस्सुम हसन के ससुर चौधरी अख्तर हसन सांसद रह चुके हैं. उनके पति मुनव्वर हसन कैराना से दो बार विधायक, दो बार सांसद, एक-एक बार राज्यसभा और विधानपरिषद के सदस्य भी रहे हैं. हिंदू गुर्जरों की निष्ठा कलस्यान चौपाल में है, तो मुस्लिम गुर्जरों की चबूतरे पर. यह बात अलग है कि दोनों ही कलस्यान खाप से हैं. इन्हीं दोनों स्थानों पर कैराना की राजनीतिक केंद्रित रही. अब फिर से तय हो गया है कि कैराना सीट के उपचुनाव में भी परिणाम चाहे जो भी हो. जीत बीजेपी की हो या गठबंधन प्रत्याशी की, लेकिन कैराना की सियासत का रिमोट तो चौपाल और चबूतरे के हाथ में ही रहेगा.
हुकुम परिवार सियासी सफर
1974 में पहली बार हुकुम सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने. 1980 में जनता पार्टी (एस) और 1985 में फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते. इसके बाद बीजेपी में आने पर 1996, 2002, 2007, 2012 में कैराना सीट से लगातार सात बार विधायक चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद हुकुम सिंह ने राजनीतिक विरासत बेटी मृगांका सिंह के हाथ में सौंपने का निर्णय लिया और 2017 के विधानसभा चुनाव में मृगांका सिंह को कैराना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया. लेकिन मृगांका सिंह चुनाव जीत नहीं सकीं. हुकुम सिंह का निधन होने के बाद खाली हुई कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में अब मृगांका सिंह बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में आ चुकी हैं.
हसन परिवार का सियासी सफर
1984 में चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए. उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे चौधरी मुनव्वर हसन ने संभाली और 1991 में पहली बार कैराना सीट से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बने. तब उन्होंने हुकुम सिंह को हराया था. इसके बाद 1993 में भी मुनव्वर हसन विधायक बने. 1996 में कैराना लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर और फिर 2004 में सपा-रालोद गठबंधन के टिकट पर मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए. इसके अलावा राज्यसभा और विधान परिषद सदस्य भी रहे. वहीं 2009 में मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन बसपा के टिकट पर कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं. 2014 में सांसद बनने पर हुकुम सिंह के इस्तीफे के कारण खाली हुई कैराना विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ, तो उसमें तबस्सुम हसन के बेटे नाहिद हसन विधायक बने और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा के टिकट पर नाहिद हसन चुनाव जीतकर विधायक बने.


