लचर तैयारी से अखाड़ा परिषद के बाद अब दंडी सन्यासी नाराज, करेंगे शाही स्नान का बहिष्कार
इलाहाबाद : कुंभ मेला को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली संत-महात्माओं को नहीं भा रही है। लचर तैयारी से नाराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शाही स्नान का बहिष्कार की चेतावनी दी थी अब आदिशंकराचार्य की परंपरा का निर्वाहन करने वाले नारायण स्वरूप दंडी संन्यासी भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली से कुपित हैं।
दंडी संन्यासी अधिकारियों से उचित तवज्जो न मिलने से नाराज हैं। वह माघ मेला की भांति आगामी कुंभ में सुविधा चाह रहे हैं। दंडी संन्यासियों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ अखाड़ों को खुश करने में लगा है, दंडी संन्यासियों की उसे चिंता नहीं है।
संगम तट पर हर साल माघ मेला में 80 बीघा में दंडी संन्यासियों का दंडी स्वामीनगर बसता है। मोरी मार्ग से ओल्ड जीटी रोड तक संन्यासियों के 127 शिविर लगते हैं, जिसमें एक हजार के लगभग दंडी संन्यासी भजन-पूजन करते हैं। दंडी संन्यासी मेला का मुख्य आकर्षण होते हैं। यही कारण है कि प्रशासन उन्हें शिविर लगाने के लिए टेंट, शौचालय, पेयजल, सुरक्षा सहित सारी सुविधा मुहैया कराता है। लेकिन कुंभ मेला में व्यवस्था बदल जाती है।
प्रशासन का पूरा ध्यान सिर्फ अखाड़ों पर रहता है। दंडी संन्यासियों को न उचित जमीन मिलती है, न कोई सुविधा। इससे उन्हें शिविर लगाने में दिक्कत होती है, जिसके चलते सैकड़ों संन्यासी चाहकर भी कुंभ में कल्पवास करने नहीं आ पाते। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम व महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम प्रशासन के रवैए से नाराज हैं। वह कहते हैं कि प्रशासन अखाड़ों को महत्व दे, उससे हमें कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन दंडी संन्यासियों की उपेक्षा न करे। हमारा कल्पवास निर्विघ्न संपन्न हो, उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की है, जिसे वह पूरा कराए। अगर ऐसा न हुआ तो हम कुंभ का बहिष्कार करके मेला प्रशासन कार्यालय पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे, जिसमें देशभर के दंडी संन्यासी शामिल होंगे



