कथाकार शोभनाथ शुक्ल के उपन्यास ‘अंगूठे पर वसीयत का लोकार्पण हुआ

( विनय मिश्रा ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। साक्षी सृजन संवाद समिति एवं हिंदी साहित्य संस्थान के संयोजन में बायोवेद शोध संस्थान के सभागार में कथाकार शोभनाथ शुक्ल के उपन्यास ‘अंगूठे पर वसीयत का लोकार्पण हुआ। ‘ग्राम्य कथा का वर्तमान परिदृश्य और अंगूठे पर वसीयत का औपन्यासिक दृष्टिकोण विषय पर साहित्यकारों ने चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि व आलोचक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने की और मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. राम किशोर शर्मा मौजूद रहे। उपन्यास पर चर्चा करते हुए प्रो. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि इसमें आर्थिक संस्कृति को बढ़ावा देने की मानसिकता का सटीक विवेचन किया गया है। संवेदना का उपयुक्त नियोजन किया है। सकारात्मक और नकारात्मक चरित्रों का वर्णन बहुत सजीव है। प्रो. रामकिशोर शर्मा ने कहा कि अंगूठे पर वसीयत अंततः ठेंगे पर वसीयत का अर्थ प्रदान कर रहा है, क्योंकि संतानें अपने दायित्व से दूर हट रही हैं। साथ ही स्त्री के अधिकारों की चेतना भी इस उपन्यास की उपलब्धि है। घटनाओं को सृजनात्मक रूप से चित्रित किया गया है। डॉ. रामजी मिश्र ने कहा कि यह उपन्यास अंचल और आंचलिक भाषा का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही इसमें जिजीविषा का विवेचन है। अवनीश यादव ने कहा कि यह उपन्यास विमर्श के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यवहार की दृष्टि से स्वीकार किया जाना चाहिए। कथाकार चित्रेश ने कहा कि इस उपन्यास में संघर्ष और विजन की निरन्तर मौजूदगी बनी हुई है। यह सामाजिक तनाव से मुक्त नहीं है। विजय चित्तौरी ने कहा कि यह उपन्यास नारीविमर्श और नारी चेतना की कथा भी है। उपन्यास लेखक डॉ. शोभनाथ शुक्ल ने कहा कि समय, समाज और जीवन की व्यापक प्रस्तुति और सामाजिक समरसता को जनसरोकारों की पक्षधरता के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास है उपन्यास ‘अंगूठे पर वसीयत। जीवन में गांव की पृष्ठभूमि का बने रहना इस उपन्यास की विशेषता है। चर्चा में बायोवेद शोध संसथान के निदेशक निदेशक डॉ. वीके द्विवेदी, आलोचक सुरेश चन्द्र शर्मा व अन्य ने विचार रखे।




