लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक- एक अशांतिदूत हमारी शांति और सुरक्षा जिसकी ऋणी है

( ज्योति श्रीवास्तव ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। भारत भूमि अनेक अनमोल रत्नों को जन्म देने के लिए जानी जाती है ऐसे ही एक अनमोल रतन है बाल गंगाधर तिलक । 23 जुलाई अट्ठारह सौ छप्पन को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में बाल गंगाधर तिलक का जन्म हुआ। सच में रत्नागिरी की धरती में कोहिनूर से भी अधिक मूल्यवान रत्न को तिलक के रूप में उत्पन्न किया । इसे एक सुखद संयोग ही कहा जा सकता है की 23 जुलाई को भारत माता के एक और अमर सपूत का जन्म हुआ उनका नाम चंद्रशेखर आजाद है इलाहाबाद का आजाद पार्क आज भी उनके सम्मान पूर्वक बलिदान की गवाही दे रहा है हम बाल गंगाधर तिलक और आजाद के जीवन के किस्सों को बारी बारी से प्रस्तुत करने की कोशिश करेंगे । तत्कालीन मुंबई प्रांत के लॉ कॉलेज में बाल गंगाधर तिलक की शिक्षा-दीक्षा हुई 1890 से तिलक कांग्रेस से जुड़ गये स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है यह नारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने ही दिया है 1893 में गणेश महोत्सव और शिवाजी महोत्सव का आरंभ किया देश की सोई हुई जनता में जागृति लाने का प्रयास किया। बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजी में मराठा दर्पण और मराठी में केसरी नाम से पत्र निकाला और अपने पत्र के माध्यम से देश में स्वराज्य प्राप्ति का आंदोलन चलाया तिलक ने अपने पत्र केसरी में देश का दुर्भाग्य नामक शीर्षक से लेख लिखा जिसमें ब्रिटिश सरकार के नीतियों का विरोध किया फल स्वरूप उन्हें देशद्रोह के सजा के रूप में वर्मा के मांडले जेल में 6 वर्ष का कारावास दिया गया वहीं पर उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक गीता रहस्य जो श्रीमद्भागवत गीता का सर्वश्रेष्ठ रूपांतरण है । की रचना की लोकमान्य कांग्रेस की नरम नीतियों के खिलाफ थे । 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो गुटों में बट गई गरम दल का नेतृत्व तिलक ने किया। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान लाल बाल पाल नाम से एक त्रिगुट विख्यात हुआ जिसमें पंजाब से लाला लाजपत राय बंगाल से बिपिन चंद्र पाल और महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक शामिल थे कितना गौरवपूर्ण दौर रहा होगा जब देश में क्षेत्रीय और भाषाई दीवारे नहीं थी और बंगाल महाराष्ट्र पंजाब का एकमात्र उद्देश्य स्वराज्य रहा होगा बाल गंगाधर तिलक के सहयोग से ही 1916 के कांग्रेसी अधिवेशन में जो कि लखनऊ में हुआ था कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एकता स्थापित करने की कोशिश की गई इसी दौरान तिलक में आयरिश महिला जो कि कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष भी थी श्रीमती एनी बेसेंट के सहयोग से होमरूल आंदोलन चलाया देश की आजादी के लिए बाल गंगाधर तिलक का योगदान सदैव ही किसी भगीरथ प्रयास से कम नहीं आंका जाएगा देश की आने वाली पीढ़ियां शांतिपूर्वक सुखद जीवन स्वतंत्रता के साथ जी सके इसके लिए उन्होंने स्वयं को भारत भारत का अशांतिदूत भी कहलाने से कोई परहेज नहीं किया विदेशी विद्वान वैलेंटाइन शिरोल ने बाल गंगाधर तिलक को भारत का अशांति जनक कहा है।



