मातमे शह का ज़माना आ गया”

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज माहे मोहर्रम का चाँद नज़र नहीं आया लेकिन करबला के शहीदों की याद मे ग़म मनाने का सिलसिला इसलामिक माह ज़िलहिज्जा की २९ सोमवार से शुरु हो गया। इस्तेक़बाले अज़ा के साथ मातम मजलिस की शुरुआत हो गई।दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा अरब अली खाँ मे इस्तेक़बाल ए अज़ा का जुलूस कोविड गाईड लाईन को अमल मे लाते हुए नहीं निकाला गया।जुलूस के स्थान पर इमामबाड़े मे मजलिस आयोजित की गई।शायर नजीब इलाहाबादी के संचालन मे हुए मातमी कार्यक्रम की शुरुआत मर्सियाख्वान नज़र अब्बास खाँ के ग़मज़दा सोज़ व सलाम से हुई। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने मजलिस को खेताब किया।मजलिस मे करबला के बहत्तर शहीदों की हक़ और इन्सानियत की खातिर दी गई क़ुरबानी का ज़िक्र किया।मजलिस में हज़रत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े की शबीह मख्मल की चादर व गुलाब चमेली के फूलों से सजा कर निकाली गई।अन्जुमन हैदरी,अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा,अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया,अन्जुमन असग़रिया व अन्जुमन हुसैनिया क़दीम के नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ा तो हर ओर से आहो बुका की सदा गूँजने लगी। इस्तेक़बाले अज़ा के मातमी कार्यक्रम मे मुन्तज़िर मेंहदी,मौलाना अख्तर शाह बहादर,हुसैन बहादर,गौहर काज़मी,ताशू अल्वी,तुराब हैदर सै०मो०अस्करी मशहद अली खाँ फसाहत हुसैन अब्बास ज़ैदी ज़ामिन हसन सफदर अब्बास डेज़ी,सरताज नक़वी,वसीम मोअय्या,यूशा खान शादाब ज़मन,शुऐब खान,वसीम आदि मौजूद रहे। माहे मोहर्रम के चाँद निकलने की कहीं से भी तसदीक़ नही हो पाई।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के अनुसार इसलामिक माह ज़िल्हिज्जा की २९ को मोहर्रम के चाँद के दीदार नहीं हुए।लखनऊ चाँद कमेटी के सैफ अब्बास इलाहाबाद के शिया धर्म गुरु मौलिना जव्वादुल हैदर रिज़वी ने चाँद नहीं दिखाई देने की तसदीक़ करते हुए बताया की माहे ज़िलहिज्जा की तीस को मोहर्रम के चाँद के साथ बुधवार से दो माह और आठ दिनो तक ग़म मनाने का सिलसिला शुरु हो जायगा।अस्करी ने बताया की माहे मोहर्रम की दसवीं २० अगस्त शुक्रवार को होगी।



