आयरन लेडी के नाम से मशहूर हो रहीं ये पुलिस अधिकारी, DSP श्रेष्ठा से बेबाक बातचीत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जनपद में बतौर डीएसपी के पद पर तैनात एक महिला पुलिस अधिकारी जो कि आज समाज मे एक मिशाल कायम कर चुकी हैं।
उनका कहना है कि जीवन मे संघर्ष के साथ कुछ भी हासिल करना नामुमकिन नही।यदि इंसान कड़ी मेहनत के साथ किसी कार्य मे लगता है तो निश्चित ही उसे सफलता मिलती है।हम बात कर रहे हैं लखीमपुर जनपद के धौरहरा सर्किल की क्षेत्राधिकारी डीएसपी ठाकु श्रेष्ठा ठाकुर की।
बीते माह अप्रैल में उनकी तैनाती लखीमपुर में हुई है।इससे पूर्व वह कई जनपदों में कुशलता पूर्वक सेवा दे चुकी हैं।उन्होंने अपनी प्रारम्भिक व उच्च शिक्षा कानपुर नगर में पूर्ण की।जिसके बाद सत्र 2012 में प्रथम प्रयास में ही प्रांतीय पुलिस सेवा में सफलता हासिल किया जिसमे 37वां रैंक मिला।मुरादाबाद में प्रशिक्षण सम्पन्न कर नोयडा, बुलन्दशहर के अनूप शहर और स्याना सर्किल में तैनाती रही।
सितम्बर 2016 से जून 2017 तक। 14 जुलाई 2017 में बहराइच तबादला हुआ। जहां पुलिस लाइन, ट्रैफिक के अलावा सीओ महसी और सीओ रिसिया रही।जिसके बाद वर्तमान लखीमपुर जनपद में स्थानांतरण हुआ तो पुलिस लाइन के बाद सीओ धौरहरा के पद पर तैनात हैं।
पहली बार मे ही सफलता हासिल करने वाली बहादुर महिला पुलिस अधिकारी बहुत सहज स्वाभव की हैं।अपने कर्तव्यों के प्रति उनमे “तन तो एक सराय है,आत्मा है मेहमान।” “तन को अपना मानकर,मोह न कर नादान।।” की भावना दिखाई देती है। नाना साहब पेशावर की जन्मभूमि जो कि गंगा की निर्मल हिलोरों के बीच बसी औद्योगिक नगरी कानपुर में ढाई दशक पूर्व एक क्षत्रिय परिवार में श्रेष्ठा का जन्म हुआ। इनका परिवार सदाचारी, सभ्य व सौम्य रहा। मां-बाप व भाई के सहयोग से श्रेष्ठा को उस उद्देश्य की प्राप्ति हुई जो कि उनके मन-मस्तिष्क में स्थान घेरे हुए था।सभी गुणों से परिपूर्ण धैर्यवान, हसमुख श्रेष्ठा ठाकुर आयरन लेडी की श्रृंखला में शुमार हो चुकी है। बीते 28 अप्रैल 2018 को ठाकुर श्रेष्ठा को “हिंदुस्तान टाइम्स वूमेन अवार्ड 2018” से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित किया गया है।
बीते दिवस हमारे संवाददाता द्वारा किए गए साक्षात्कार में डीएसपी श्रेष्ठा ठाकुर की सफलता का राज खुलकर सामने आया। श्रेष्ठा ठाकुर से अपने लखीमपुर स्थित आवास पर साक्षात्कार के दौरान बड़ी बेवाकी के साथ प्रति उत्तर दिया। श्रेष्ठा ने अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर व माता-पिता व भाई के साथ सकल समाज को दिया है। इनकी न्यायप्रियता व निष्पक्षता का ज्वलन्त उदाहरण बुलन्दशहर की घटना है। जिसमे इन्होंने सत्ता पक्ष से सीधा टक्कर ले लिया था जिसके परिणामस्वरूप इनका स्थानान्तरण हो गया।स्थानांतरण की बात पर ठाकुर श्रेष्ठा ने कहा कि नौकरी में स्थानान्तरण एक स्वस्थ्य परम्परा है। मुझे इसका कोई मलाल नहीं है।
निष्पक्षता व न्यायप्रियता के साथ देश हित व समाज हित में कार्य करना मेरा उद्देश्य है।उन्होंने बताया कि जब वह बुलन्दशहर में थी तो एक दहेज हत्या केस की विवेचना इन्हें मिली। जिसमे आरोप था कि दो ननदो ने मिलकर दुल्हन को जला दिया।जांच शुरू किया तो पहले दबाव फिर लालच का प्रस्ताव आया तो इन्होंने कहा कि मुझे सच समझ में आ गया। पड़ताल में पता चला कि दोनो ननदो ने दुल्हन का हाथ पकड़कर जला कर मार डाला। वह बचाव के लिए बिलखती रही।परिणाम स्वरूप दोनो को गिरफ्तार कर जेल भेजा। यह न्यायिक कार्य इनको सुखद अनुभूति प्रदान करता है।
नारी सशक्तीकरण पर सशक्त शिक्षा, जागरूकता जागरण व जिम्मेदार मिशनरियों के सतत सहयोग समर्पण एवम एनपीओ के कार्यशैली की धरातलीय समीक्षा को आवश्यक बताया।उन्होंने समाज की युवतियों को इन लाइनों के माध्यम से सन्देस दिया कि “मंजिलें उनको मिलती है जिनके सपनो में जान होती है, पंखो से कुछ नहीं होता, हौसलो से उड़ान होती है।”लक्षित लक्ष्य को पाने हेतु दृढ़ संकल्प शक्ति जरूरी है।ऐसे प्रतिभागियों की मेरी अपनी निजी राय है कि अवसाद तथा आलस्य को त्याग कर लगन के साथ मेहनत करते रहें,निश्चित ही सफलता कदम चूमेगी। हमारे एंकर द्वारा जब कहा गया कि आपकी न्यायप्रिय कार्यशैली जो कि समाज के अराजकतत्वों को नही भा रही है तो ठाकुर श्रेष्ठा ने हंसते हुए कहा कि”फानूस बनके जिसकी हिफाजत खुदा करे, वह शंमा क्या बुझेगी जिसको रोशन खुदा करे।”ईश्वर से बढ़कर इंसान नही।जीवन मे हमेशा यूं ही कार्य करने का तरीका बना रहेगा।समाज हित व देश सेवा में जान न्यौछावर करने को तैयार रहती हूं।

