इलाहाबाद समाचार

गांजे का अवैध खेल, मोहरे भी पुलिस के चाल भी पुलिस की, जानिये पूरा माजरा

इलाहाबाद। फोटो में गले में हाथ डाल कर खड़ा शख्स मुट्ठी गंज थाने की गऊघाट चौकी का सिपाही अजय सिंह है, उसके सामने खड़ा युवक नैनी के स्टेशन रोड स्थित भांग की एक दुकान का कर्मचारी है।

यह फोटो मंगलवार दोपहर अलोपीबाग की है, यहीं से मुट्ठी गंज थाने की हटिया चौकी के प्रभारी अपने हमराह दो सिपाहियों के साथ इस युवक को पकड़ कर थाने ले गए जहां इस युवक ने लगभग ढाई किलो गांजा को जन्म दिया और इसी जुर्म में अब जेल की यात्रा करेगा जैसा कि स्थानीय पुलिस का कहना है।

अब आप युवक की गिरफ्तारी के पीछे का माजरा समझिए….खुद को सीओ बैरहना के STF का सिपाही बताने वाला अजय दो दिन पूर्व युवक विकास की दुकान पर गया था और उससे अपने सिस्टम के मुताबिक सौदेबाजीकरना चाहा लेकिन बात नहीं बन सकी।

जेल भेज देने की धमकी देकर वह चला गया था। दुकान मालिक ने अजय के पास इस बात की सिफारिश करा दी कि उसे अवैध धन उगाही के लिए परेशान न किया जाय। यह बात उसे व उसके साथी पुलिस कर्मियों को नागवार गुजरी और उसके कर्मचारी विकास को मिलने के बहाने बुलाकर पकड़ लिया गया।

पुलिसकर्मियों ने एक नई परंपरा को भी जन्म दिया। प्रायः गांजा,चरस आदि मादक पदार्थों के साथ मुल्जिम पकड़े जाते हैं लेकिन यहां पहले मुल्जिम बाद में माल पकड़ा गया। खेल आप खुद समझ सकते हैं।

अब आप भांग की दुकानों पर चल रहे गोरखधंधों और उनमें पुलिस की संलिप्तता बारे में जानिए……
जिलेभर में आवंटित की गई भांग की लगभग सभी दुकानों पर धड़ल्ले से गांजा बेचा जाता है। यह सबकुछ पुलिस की मिलीभगत से होता है।

गांजा बेचे जाने के एवज में पुलिस मोटी रकम लेती है। बीट सिपाही,चौकी इंचार्ज, एसओ और सीओ सबका पैसा तय होता है। आबकारी विभाग और क्राइम ब्रांच व एसटीएफ के भी लोग मुंह मारते हैं इन्हें भी कुछ न कुछ खाने को मिल जाता है। बिना पुलिस की कृपा के किसी भी दुकान पर तोलाभर भी गांजा नहीं बिक सकता है।

मजेदार बात यह है कि ऊपर के अधिकारी यानी डीजीपी या एडीजी आदि मादक पदार्थों की बिक्री रोकने व इस कारोबार से जुड़े लोगों की धरपकड़ का आदेश देते हैं तो खैरात का माल खाने वाले पुलिसकर्मी छुटभैया दुकानदारों को पकड़कर मामूली माल बरामद दिखाकर अभियान का कोरम पूरा कर देते हैं।

यदि किसी दुकानदार को एसओ या सीओ एक बार पकड़ लिए तो उसका रेट बढ़ना लगभग तय है, ऐसे में उस दुकान पर गांजे की बिक्री बढ़ना भी लाजिमी है। एक तरह से यह कहा जाए की पकड़े जाने के बाद दुकानदार को खुलेआम अपना कारोबार करने का लाइसेंस मिल जाता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ऐसा ही एक मामला कुछ दिनों पूर्व कीडगंज थाना क्षेत्र में देखने को मिला। भांग की एक दुकान से सेल्समैन को गांजा बेचते हुए सीओ द्वारा पकड़ा गया था, इसके बाद भी उस दुकान पर पहले की तरह गांजा की बिक्री जारी है। ऐसा कैसे हो रहा है इसे कोई भी आसानी से समझ सकता है।

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