मंच तैयार था, संचालक भी आ गए थे मुशायरे को ऐन मौके पर प्रशासन ने रद कर दिया

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुक्रवार की शाम आयोजित किया गया मुशायरा विवादों में घिर गया है।
सोशल मीडिया पर शाहीनबाग मुद्दे और मुशायरे को लेकर छिड़ी बहस
अतिथियों को प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने सीनेट हॉल में नहीं घुसने दिया
कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद इस मुशायरे को ऐन मौके पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने रद कर दिया। मुशायरे का मंच तैयार हो गया था और सुनने वालों की भी भीड़ आ चुकी थी पर शायरों को विश्वविद्यालय में घुसने नहीं दिया गया। यहां तक कि खुद कुलपति व मंडलायुक्त ने भी इस मुशायरे से दूरी बना ली और आने से मना कर दिया।
इसी बीच अचानक उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केंद्रीय सांस्कृतिक समिति व उर्दू विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन को निरस्त करने की घोषणा कर दी गई।
इसके पीछे कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि सम्मेलन में शाहीनबाग में सीएए और प्रधानमंत्री के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले उर्दू शायर हाशिम फिरोजाबादी तथा शबीना अदीब को बुलाया गया था।
भारत अमृत महोत्सव के तहत देश के अमर सपूतों के नाम विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन में उर्दू शायर हाशिम फिरोजाबादी तथा शबीना अदीब के अलावा इकबाल अशर, पापुलर मेरठी, ताहिर फराज, मोइन शादाब, भूषण त्यागी, भालचंद त्रिपाठी और कलीम कैसर को आमंत्रित किया गया था। सुबह से इसकी तैयारियां की जा रहीं थीं। मुशायरे के ठीक पहले सोशल मीडिया में शाहीन बाग में योगी और मोदी के विरोध में आवाज बुलंद करने वाले दो शायरों हाशिम फिरोजाबादी तथा शबीना अदीब को बुलाने को लेकर बहस छिड़ गई।
और वही विश्वविद्यालय में दो राष्ट्रविरोधी कवियों को मंच पर कैसे और किसने बुलाया। इस मुशायरे का विरोध होना चाहिए और इसे रद करना चाहिए। देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।
*विश्वविद्यालय ने मेरा अपमान किया-शबीना अदीब*
जानी-मानी शायरा शबीना अदीब ने इसे अपना अपमान कहा है। मुशायरे में शामिल होने आईं शबीना अदीब ने कहा कि कानपुर से आते वक्त रास्ते में ही मुझे पता चल गया था कि ऐसा क्यों हो रहा है। विश्वविद्यालय ने मेरा अपमान किया है।
आजादी का महोत्सव बनाने आए थे। कोई नाच-गान करने नहीं। उर्दू शायर हाशिम फिरोजाबादी ने कहा कि मुशायरे को राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। यह क्यों रद किया गया समझ से परे है। कई सीनियर शायर मंच तक पहुंचे नहीं थे और उनको मना किया गया यह कहां की संस्कृति है? यह शायरों का अपमान है।



