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अपने मान काषाय क्रोध तथा इंद्रियों को वश में करके व्रतों को धारण करना ही संयम धर्म कहलाता

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दिगंबर जैन पंचायती सभा प्रयाग के तत्वाधान में ज़ीरो रोड स्थित जैन मंदिर में पर्वराज दसलक्षण पर जैन श्रद्धालुओ की धर्म प्रभावना से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो रहा है। जैन तीर्थंकरों के जयघोष के बीच आत्मशुद्धि के इस परम पावन महापर्व के छठे दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने परम्परागत ढंग से दशलक्षण धर्म के षष्ठम स्वरूप उत्तम संयम धर्म की विशेष आराधना की।
श्रद्धालुओं ने प्रात: भगवान का अभिषेक,शांतिधारा एवं पूजन अर्चन कर विश्व में सर्वशान्ति की कामना की। तत्पश्चात पूरे श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ दशलक्षण धर्म के छठे स्वरूप उत्तम संयम धर्म की विशेष पूजन की गई।
उत्तम संयम धर्म के बारे में चर्चा करते हुए पंडित सुनील जैन ने कहा कि  मोक्ष के कामना रखने वाले व्यक्ति का अपने मान काषाय क्रोध तथा इंद्रियों को वश में करके व्रतों को धारण करना ही संयम धर्म कहलाता है।राहुल जैन ने बताया कि अहिंसा और मैत्री के द्वारा ही विश्व शांति मिल सकती है। इस दौरान जैन श्रावकों ने अपने अशुभ प्रवृतियों का परित्याग कर जैन श्रावकों ने यथासम्भव संयमित रहने का संकल्प लिया।
सायंकालीन सामूहिक आरती, शास्त्र प्रवचन एवं धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन किया गया , जिसमें समाज के लोगों एवं बच्चों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया एवं अपनी प्रतिभा दिखाई। विजयी प्रतियोगियो को पुरस्कृत किया गया। कल दिन गुरुवार को उत्तम तप धर्म की आराधना की जायेगी।

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