राष्ट्र निर्माण में गुरू और शिष्य के सम्बन्ध पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन

( अनंत पांडेय )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। राष्ट्र निर्माण में गुरू और शिष्य के सम्बन्ध पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में पंकज जायसवाल मन्त्री आर्य
प्रतिनिधि सभा ने शिक्षकों व छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नर्सरी से लेकर
उच्च शिक्षा के केन्द्र विश्वविद्यालय तक शिक्षक का विचार और व्यक्तित्व अपना प्रभाव
विद्यार्थियों पर किसी न किसी रूप में अवश्य डालता है। जबकि अधिक समय तक घर में रहने के कारण बच्चा मां से भी प्रभावित होता है। अतः इनके व्यक्तित्व अनुकरणीय होना चाहिए। विश्व के ओमान जैसे राजतन्त्रात्मक देशों में भी शासक गुरू के महात्म को स्वीकार करते है। प्राचार्या, डॉ0 रमा सिंह ने कहा कि गुरू के यदि शिष्य सीखता है । तो गुरू का दायित्व सिखाने के रूप में बढ़ जाता है। आज जब समाज में नैतिकता के पतन के साथ अव्यवस्था बढ़ती जा रही है तो गुरू का दायित्व और बढ़ जाता है। आज के विशेष सन्दर्भ में आनलाइन शिक्षण ने गुरु-शिष्य के सम्बन्धों को कमजोर किया है। ज्ञान तो विद्यार्थी अर्जित कर रहा है । पर राष्ट्र-निर्माण के लिए व्यक्तित्व का निर्माण नहीं हो रहा। इसके पश्चात् डॉ0 ममता गुप्ता, डॉ0 इभा सिरोठिया, डॉ0 सव्यसांची, डॉ० मुदिता डॉ0 रंजना त्रिपाठी ने अपने विचार रखे। छात्राओं ने शिक्षकों के प्रति अपने सम्मान को गीता, कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। शिखा, नेहा, वर्षा, प्रांशी, रागिनी
आकांक्षा आदि ने मेरी विनती सुनो हे नाथ, तथा गुरूवर सामने मेरे, हो गये सपने सच मेरे गाकर सब को मन्त्रमुग्ध किया कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ० रंजना त्रिपाठी ने किया।


