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आरक्षण लेने के कारण नियुक्ति में भेदभाव नहीं किया जा सकता

कांस्टेबल भर्ती 2018 मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला अभ्यर्थी को सामान्य वर्ग की चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करने पर नियुक्ति पाने का अधिकार है। इसी के साथ कोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती 2018 में पिछड़ा वर्ग के क्षैतिज आरक्षण में असफल महिला अभ्यर्थियों को सामान्य कोटे की चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक पाने के बावजूद नियुक्ति देने से इनकार करने को मनमानापूर्ण ठहराया है और कहा कि आरक्षण लेने के कारण नियुक्ति देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड व राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सौरव यादव केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत याचियों की तीन माह में नियुक्ति की जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने रुचि यादव व 15 अन्य और प्रियंका यादव व अन्य की याचिकाओं पर अधिवक्ता सीमांत सिंह व सरकारी वकील को सुनकर दिया है।
अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि क्षैतिज आरक्षण में याचियों को कट ऑफ मेरिट से कम अंक प्राप्त हुए। इस कारण उनका चयन नहीं हो सका। अधिवक्ता श्री सिंह का कहना था कि अब भी बहुत से पद रिक्त हैं और याचियों सामान्य वर्ग की अंतिम चयनित महिला अभ्यर्थी के अंक से अधिक अंक मिले हैं। ऐसे में याचियों ने आरक्षण मांगा था, इस आधार पर उन्हें नियुक्ति देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता। सरकार का कहना था कि याचियों को आरक्षण का दोहरा लाभ नहीं मिल सकता। वे पिछड़ा वर्ग की महिला कोटे में सफल नहीं हुईं तो सामान्य वर्ग के महिला कोटे की बराबरी की मांग नहीं कर सकती। कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और पिछड़ा वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य कोटे की महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक के आधार पर नियुक्ति का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि कट ऑफ मेरिट अंक से अधिक अंक पाने वाली अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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