अदालत और अधिकारियों की अवहेलना कर रही कौंधियारा पुलिस
चोरी और जबरन कब्जे के मामले में नहीं की कोई कार्यवाही
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कौंधियारा थाने की पुलिस के लिए अदालत का आदेश और अपने उच्चाधिकारियों का निर्देश कोई मायने नहीं है। चोरी और जबरन कब्जे के एक मामले में अनेकों बार शिकायत किए जाने के बाद भी उसके ऊपर कोई असर नहीं हुआ। न ही उसने अदालत के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराया और ना ही अपने आला अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी के विरुद्ध कोई कार्यवाही की। प्रार्थी आज भी न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहा है। इसके विपरीत पुलिस की शह पर आरोपी अदालत के आदेश का उल्लंघन करने पर आमादा है। मामला कौंधियारा थाना क्षेत्र के पीड़ी गांव का है। यहां के रहने वाले जेल विभाग से सेवानिवृत्त रामनरेश तिवारी का अपने भाई शिव नरेश तिवारी से विवाद चल रहा है जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है और कोर्ट ने बीते लगभग तीन वर्षों से स्थगन आदेश दे रखा है। रामनरेश के मुताबिक बीते फरवरी माह में शिव नरेश और उनकी पत्नी बच्चों ने जमीन कब्जाने की नीयत से उनकी पत्नी के साथ मारपीट की थी। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी थी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। रामनरेश का आरोप है कि स्थानीय पुलिस से मिलीभगत करके शिव नरेश ने सुनियोजित साजिश के तहत 27 जुलाई को उनके व उनकी पत्नी तथा खुद वह अपने बेटे के विरुद्ध 107/16 की कार्यवाही कराई। इसके बाद एक अगस्त की रात शिव नरेश अपने परिजनों के साथ उनके कच्चे मकान की पीछे की दीवार काटकर घर में घुसे और वहां रखे सामानों को गायब कर मुख्य द्वार पर अंदर से कुंडी लगा दी जिससे वह अपने ही घर में नहीं जा सकते। राम नरेश के मुताबिक जानकारी होने पर अगले दिन दो अगस्त को वह कौंधियारा थाने गए और पुलिस को घटना से अवगत कराया। लेकिन तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मौके पर जाने या आरोपी के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने की वजाय दोनों पक्षों का 151 में चालान कर दिया। रामनरेश का आरोप है कि उन्होंने मामले की शिकायत जिले के डीआईजी से भी तीन बार की लेकिन स्थानीय पुलिस ने न तो मुकदमा पंजीकृत किया और न ही कोई अन्य कदम उठाया। पुलिस की उदासीनता के चलते आरोपी का हौसला बढ़ा हुआ है और वह आए दिन परेशान करता रहता है।
*चौकी प्रभारी ने अधिकारियों को किया गुमराह*
मामले में स्थानीय चौकी प्रभारी नवीन सिंह की भूमिका काफी गैर जिम्मेदाराना और पक्षपात पूर्ण रही। उन्होंने मामले में कोई उचित कार्यवाही कर समाधान करने की जगह भ्रामक रिपोर्ट के जरिए अपने उच्चाधिकारियों को गुमराह किया। जब-जब वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले में आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया, तब-तब चौकी प्रभारी ने रिपोर्ट भेजी कि दोनों पक्षों में संपत्ति का विवाद है और उन्हें अदालत के जरिए मामला सुलझाने को कहा गया है। जबकि रामनरेश द्वारा अधिकारियों को दिए गए प्रार्थनापत्रों में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्षों के विवाद में अदालत ने स्थगन आदेश दे रखा है और वह दीवार काटकर चोरी करने और जबरन घर मे कब्जे की घटना में मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की गुहार लगा रहे हैं। यहाँ गौर करने की बात है कि स्थगन तभी दिया जाता है जब कोई मामला अदालत में विचाराधीन होता है। स्थगन आदेश दर्शाता है कि दोनों पक्ष संपत्ति के विवाद में पहले ही अदालत जा चुके हैं। ऐसे में चौकी प्रभारी द्वारा बार-बार उच्चाधिकारियों को भेजी गयी रिपोर्ट न सिर्फ गुमराह करने वाली है बल्कि आरोपी से मिलीभगत होने को भी दर्शाती है। चोरी और कब्जे की घटना को संपत्ति विवाद बताकर मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की गयी।
*एक थानाध्यक्ष ने आदेश का उल्लंघन कराया, दूसरे बना रहे अनुपालन का बहाना*
पूरे मामले में थानाध्यक्षों की भूमिका भी काफी रोचक है। मारपीट, निरोधात्मक कार्यवाही और दीवार काटकर सामान चोरी करने व जबरन कब्जा के समय जो थानाध्यक्ष रहे उन्होंने अदालत के आदेश का खुलेआम उल्लंघन होने दिया और अपने अधिकारियों के निर्देश को भी गंभीरता से नहीं लिया जिससे आरोपी ने चीजों को अपने मनमाफिक कर लिया। अब वर्तमान थानाध्यक्ष अदालत के आदेश का अनुपालन कराने की बात कर रहे। वह चोरी की शिकायत पर भी कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं हैं। पूरे घटनाक्रम को देखने से रामनरेश तिवारी के आरोप सही प्रतीत होते हैं कि पुलिस ने जानबूझकर मामले में कोई कार्यवाही नहीं की और आरोपी को शह देकर पहले आदेश की अवहेलना होने दी और अब उसके अनुपालन का बहाना बना रही है।
*सिफारिश पर भड़के थानाध्यक्ष*
मामले में कार्यवाही करने की बजाय वर्तमान थानाध्यक्ष विनोद यादव बार-बार शिकायत और सिफारिश पर प्रार्थी के ऊपर ही भड़क गए। उन्हें न अपने उच्च अधिकारियों से शिकायत रास आई और न वकील या पत्रकार से सिफारिश कराना पसंद आया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शिकायत और सिफारिश से कुछ नहीं होने वाला है। अब जो स्थिति है वही रहेगी। दीवार काटकर सामान चोरी करने या जबरन कब्जा करने से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में वह कुछ नहीं कर पाएंगे।



