भारतीय चित्रकला के इतिहास में कलाकार रवीन्द्र कुशवाहा को मिला स्थान

चित्रकार रवीन्द्र कुशवाहा के जीवन परिचय को पुस्तक में किया गया शामिल
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कला मानव को संवेदनशील बनाती है तथा मनुष्य को जीना सिखाती है गीत-संगीत, काव्य- साहित्य, चित्रकला और मूर्तिकला के सहारे व्यक्ति अपने अवसाद से मुक्ति पाता है वहीं परम आनंद को भी प्राप्त करता है। तभी सृजन क्षमता तथा रचनात्मकता के साथ मौलिकता का जन्म होता है ।’भारतीय चित्रकला का संक्षिप्त इतिहास और प्रमुख चित्रकार’ विषयक पुस्तक में प्रयागराज के प्रसिद्ध कवि- चित्रकार रवीन्द्र कुशवाहा के जीवन परिचय को प्रमुख स्थान दिया गया है, रवीन्द्र कुशवाहा वर्तमान समय में राज्य ललित कला अकादमी के कार्यकारिणी सदस्य भी हैं। उल्लेखनीय है कि चित्रकार विगत 35 वर्षों से कला क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा इनके द्वारा किए गए कला संरक्षण और संवर्धन के कार्य को रेखांकित करते हुए इनके कलायात्रा, कला शैली, जीवन संघर्ष और सफलता को इस पुस्तक में समाहित करते हुए शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में कला के आदिकाल से आधुनिक काल तक की यात्रा को सरल,सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जो कला के टीजीटी तथा पीजीटी एवं फाइन आर्ट के विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए भी उपयोगी है। भारतीय प्रमुख चित्रकारों के जीवन परिचय के साथ उनकी उपलब्धि को प्रमुखता से दिखाया गया है। राजस्थान के जाने-माने साहित्यकार और चित्रकार रमेश शून्य द्वारा रचित पुस्तक की भूमिका बबीता कुमारी ने लिखी है। उनका मानना है।कलाकारों के जीवन और उनकी कलाकृतियों से नवोदित कलाकार और कला के विद्यार्थी रचनात्मक वृत्तियों की ओर उन्मुख होंगे तथा सकारात्मक और रचनात्मक कृतियों का सृजन होगा।



