१२ दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले में शिल्पगत सामग्रियों की धूम मची





खसवा छऊ नृत्य झारखण्ड से आये कलाकारों ने की अद्भुत प्रस्तुति
राम जपो, राम जपो बांवरे’ सुनाकर पण्डाल को भक्तिमय बना दिया
(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के अद्भुत संगम तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरती पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज द्वारा १२ दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले की आज सातवंे दिवस में जहाँ एक ओर शिल्पगत सामग्रियों की धूम मची थी वहीं हरियाणा राज्य के सुदूर अंचल से आये कलाकारों द्वारा बीन की मनोहारी धुनों पर आगन्तुक दर्शकों को थिरकते हुए भी देखा गया। विभिन्न अंचलों के व्यंजनों का स्वाद लेकर दर्शक सायंकालीन सभा के लिए उत्सुक रहे। सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ प्रयागराज शहर उत्तरी के बहुचर्चित विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के द्वारा दीप ज्योतियों को प्रज्ज्वलित कर किया गया। केन्द्र निदेशक ने पुष्पगुच्छ भेंटकर व अंगवस्त्र पहनाकर युवा मुख्य अतिथि का स्वागत किया। अपने संभाषण में मुख्य अतिथि द्वारा सामाजिक रीति-रिवाजों पर लोकगीतों की बानगी और गंगा-जमुनी तहजीब से सराबोर लोकनृत्यों के चलन पर भी प्रकाश डाला साथ ही विभिन्न प्रान्तों के कलाकारों का प्रयागराज की इस धरा पर स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की। इस अवसर पर प्रयागराज की सुपरिचित गायिका सुश्री प्रियंका सिंह चौहान द्वारा गणेश वंदना ‘घर में पधारो गजानन जी’ और ‘राम जपो, राम जपो बांवरे’ सुनाकर पण्डाल को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात वियोग पक्ष के लोकगीतों की लड़ी में ‘राने सुनुरा से मरिया पियार बिरना’ को दर्शकों ने काफी सराहा, वहीं भोजपुरी गीतों की लड़ी लेकर के जौनपुर से पधारे युवा भोजपुरी गायक अवनीश तिवारी ने अपनी मीठी आवाज में भोजपुरी गीतों की माला के रूप में विवाह संस्कार में गाये जाने वाले गीत ‘केतना बताई सुख ससुरे कगोरि रे’ व ‘पिया तोहरे दरसवा निजोर लागी रे’ को दर्शकों ने अपनी तालियों से सराहा। लोकनृत्यों की श्रृंखला में हिमांचल से आये कलाकारों ने नाटी नृत्यों की प्रस्तुति की, भगवान योगेश्वर के बाल रूप को समर्पित डांडिया रास की प्रस्तुति गुजरात से आये नितिन दवे और उनके साथियों ने दी। समृद्ध पंजाब की माटी की महक को जिंदुआ नृत्य के रूप में पंजाब के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया वहीं झारखण्ड से आये कलाकारों ने खसवा छऊ नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों की भूरि-भूरि प्रसंशा मिली। कार्यक्रम की अगली पायदान पर प्रयागराज की वरिष्ठ सुपरिचित नृत्यांगना कृति श्रीवास्तव व उनके दल द्वारा पूर्वी लोकनृत्य तथा दोआबा क्षेत्र के पारम्परिक ढंेडिया नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र निदेशक ने सभी उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।



