धर्म का पालन केवल मानव देहधारी ही कर सकता है- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

(अनुराग शुक्ला )डोम्बीवली,पूर्व (अनुराग दर्शन समाचार )। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य अपने प्रतिनिधि मण्डल के साथ महाराष्ट्र के प्रवास पर पहुँचे । श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने तृतीय दिवस राजेश अनन्ता पाटिल एवम् सुभाष अनन्या पाटिल द्वारा डोम्बीवली (पूर्व) में आयोजित धर्म सभा में उपस्थित सनातन धर्मावलम्बियों को अपना आशीर्वचन एवम् मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि
“नर समान नहिं कवनिउ देही |
जीव चराचर जाचत तेही ||
यह मानव शरीर बड़े भाग्य से प्राप्त होता है, इसलिए ब्यक्ति को सदैव शास्त्रों द्वारा निर्दिष्ट मार्ग पर चलकर अपने कर्तब्यों का पालन करते हुए अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए|
पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा मनुष्य और पशु की प्रकृति एवम् प्रवृत्ति लगभग समान होती है, लेकिन धर्म का पालन केवल मानव देहधारी ही कर सकता है, इसीलिए कहा गया है कि “बड़े भाग मानुष तन पावा” । धर्म मंच पर धर्म पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी अरुणानन्द जी महाराज कमलेश शास्त्री जी, स्वामी अखण्डानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी केदारानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी बृजभूषणानन्द जी महाराज सहित अन्य सन्त एवम् विद्वत्जन विराजमान थे |



