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युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिये प्राचीन सँस्कृति को अपनाना जरूरी

नई दिल्ली। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर महाराज के सानिध्य में तालकटोरा स्टेडियम, दिल्ली में सांस्कृतिक महोत्सव 2018 का आयोजन 28 से 30 जुलाई 2018 तक किया गया।

हमारे देश की युवा पीढ़ी को संस्कृति का बोध कराने और एक नए भारत का निर्माण करने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरिराज सिंह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सम्पल जी, राज्यसभा सांसद  डॉ सत्यनारायण जटिया, सांसद श्रीमती प्रियंका सिंह रावत एवं सांसद डॉ स्वामी साक्षी महराज ने कार्यक्रम में अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज करवाई।देवकीनंदन ठाकुर महाराज द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। ।

तीन दिवसीय यह कार्यक्रम में हर दिन एक अलग विषय पर रहा। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम की थीम हर दिन अलग रखी गई थी।

पहले दिन की थीम नारी शक्ति पर आधारित थी जिसमें अपने क्षेत्र में विशिष्ठ योगदान देने वाली नारी शक्ति को स्मृति चिन्ह एवं सहयोग राशि देकर सम्मानित किया गया, तो वहीं दूसरे दिन की थीम हमारे देश के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों को समर्पित थी जिसमें हमारे वीर जवानों और शहीदों के परिवार वालों को स्मृति चिन्ह एवं सहयोग राशि देकर सम्मानित किया गया।

तीसरे दिन की थीम संस्कृत, संस्कृति और संस्कार, भारत वर्ष का एक आधार, आओ करें एक नए भारत का निर्माण है।

पूज्य देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कार्यक्रम में सभी जनता को संबोधित किया एवं कार्यक्रम में मौजूद सम्मानित जनता और अतिथियों का कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति है। भारत देश संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के समावेश वाला देश है, हमारी परंपराएं, भाषाएं और कलाएं ही हमारी पहचान है।

प्राचीन सभ्यता के बलबूते ही आज हम एक सभ्य समाज में जी रहे है। हमारे ऋषि परंपराओं ने ही हमे संस्कृत, संस्कृति और संस्कार का बोध कराया है।

भारतीय संस्कृति में इतनी ताकत है कि पाश्चात्य संस्कृति भी भारतीय संस्कृति से प्रभावित रही है। भारतीय संस्कृति के प्रति पाश्चात्य लोगों में जिज्ञासा बढ़ रही है और वो भारतीय संस्कृति को जानने समझने भारत आते हैं।

भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण तत्व शिष्टाचार, सभ्य संवाद, धार्मिक संस्कार, मान्यताएँ और मूल्य आदि हैं। आज कल हर व्यक्ति की जीवन शैली आधुनिक हो रही है लेकिन भारतीय पूरे विश्व में जहां भी है वहां वह आज भी अपनी परंपरा और मूल्यों को बनाए हुए हैं।
महराज श्री ने कलचर टेरेरिजम पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के युवा आइटम सांग देखते हैं क्या वो बच्चे संस्कारी बनेंगे, अगर बच्चों को संस्कारी बनाना है तो गीता पढ़ाओ, रामायण पढ़ो, आप आइटम सान्ग देखकर संस्कारी नहीं बन सकते।

उन्होंने कहा कि आजकल कान्वेट में पढ़ने वालें बच्चों को कहा जाता है कि आप चोटी नहीं रख सकते, हाथ में कलेवा नहीं बांध सकते, तिलक नहीं लगा सकते अगर आपने ऐसा किया तो आपको स्कूल से निकाल दिया जाएगा। क्या यह हमारे संस्कारों, संस्कृति को खत्म करने की साजिश है।

महाराज श्री ने मंत्री गिरिराज सिंह के समक्ष यह बात रखी तो मंत्री जी ने कहा की अगर मिशिनरी का स्कूल हमारे संस्कारों का विरोध करता है त पूरे देश को उसका विरोध करना चाहिए।

महाराज श्री ने कहा कि हमारे नए देश का निर्माण वो युवा करेगा जिसके एक हाथ में कम्प्यूटर और एक हाथ में गीता होगी। उन्होंने कहा कि अगर हॉलैंड में गीता पढ़ाई जा सकती है, विदेशी धरती पर गीता के उपदेश दिए जा सकते हैं तो भारत में क्यों नहीं पढ़ाई जाती।

महाराज श्री ने कहा कि हर महीने ऐसे आयोजन होने चाहिएऐ ताकि भारतीय युवाओं को भारत की संस्कृति को जानने का अवसर मिल सके। महाराज श्री ने युवाओं को सफल होने का मंत्र भी दिया, उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे सरल उपाय है कि अपने माता पिता के चरणों का आशीर्वाद हर दिन लिया करों और सफलता आने के बाद अहंकार मत आने दो क्योंकि अहंकार हमे फिर से गर्त में ले जाता है।

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