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यूक्रेन में फंसे कानपुर के पांच स्टूडेंट

युद्ध शुरू होने के बाद से अपनी जान बचाने के लिए बंकर में छिपे

भारत वापसी के लिए सरकार से लगाई गुहार

कानपुर (अनुराग दर्शन समाचार ) । यूक्रेन में युद्ध के बीच यूपी के कई मेडिकल छात्र फंस गए हैं। इनमें से पांच छात्र और छात्राएं कानपुर से हैं। कुछ छात्र-छात्राएं युद्ध शुरू होने के बाद से अपनी जान बचाने के लिए बंकर में छिपे हुए हैं। लगातार चारों तरफ गोला बारी और धमाके हो रहे हैं। कब जान चली जाएगी किसी को भरोसा नहीं है। सभी अपनी जान बचाने और खाना-पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारत वापसी के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
यूक्रेन के खारकिव में फंसी जेनसी दहशत में है। जेनसी ने बताया कि चारों तरफ युद्ध चल रहा है। कहीं बम गिर रहे हैं तो कहीं मिसाइलें। खाने-पीने और जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। बम धमाकों से ही हमारी नींद उड़ी हुई है। कब जान चली जाएगी कोई भरोसा नहीं है। स्थानीय प्रशासन की मदद से मेट्रो के नीचे यार्ड में रखा है। बताया है कि यह स्थान सबसे सुरक्षित है। जेनसी ने बताया कि हमारे साथ अन्य छात्र लगातार भारत एंबेसी से संपर्क में हैं। हम लोगों को फ्लाइट से वापस आना था लेकिन एयरपोर्ट नष्ट होने से प्लेन बिना छात्रों को लिए वापस लौट गया। गुमटी नंबर 5 में रहने वाली जेनसी की मां पूजा सिंह की मां बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए रात-दिन भगवान से दुआ और पूजा-पाठ कर रही हैं। तीन भाइयों में इकलौती बहन जेनसी यूक्रेन के वीएन कराजिन खारकिव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस फोर्थ ईयर की पढ़ाई कर रही हैं। वह खारकिव के सरपनिया में बने अपार्टमेंट में रहती थीं। भाई भरत ने बताया कि वह लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनके बहन की भारत वापसी हो जाए।
कॉलेज के बेसमेंट में छिपाकर सभी छात्रों को रखा गया। सूटरगंज में रहने वाली डीजी कॉलेज की प्रोफेसर डॉ.मधुरिमा सिंह की बेटी अक्षरा और बेटा आरव भी युद्ध के दौरान यूक्रेन में फंस गए हैं। डॉ.मधुरिमा ने बताया कि उनके दोनों बच्चे एमबीबीएस सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें कॉलेज के बेसमेंट में छिपाकर सभी छात्रों को रखा गया है। कल गुरुवार को मेस में खाने के लिए गए लेकिन इस दौरान हमले के धमाकों से उन्हें वापस बेसमेंट में पहुंचा दिया गया है। मोबाइल डिस्चार्ज हो गया है। खाने-पीने के लिए कुछ नहीं है। किसी तरह जिंदगी बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। एंबेसी से लगातार बच्चों की वापसी के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। दोनों बच्चों की जिंदगी फंसी होने से दंपति ने खाना-पीना, सोना सब छोड़ दिया है। पूरा परिवार तनाव में है।युद्ध नहीं थमा तो जिंदगी बचाना मुश्किल, भारत को ही कुछ करना होगा

*हालात भयावह*

कानपुर के कमला टावर निवासी श्रेय सिंघानिया यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब 550 किमी दूर जेप्रोजेह शहर के एक कॉलेज से एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र हैं। श्रेय ने बताया कि वापसी को लेकर असमंजस है। यहां फंसे छात्रों को वापस बुलाने के लिए भारत को ही प्रयास करना होगा।
वह एक फ्लैट में कुछ अन्य छात्रों के साथ रहता है। जेप्रोजेह के हालात भयावह है कि अब बच पाएंगे या नहीं यह कहना मुश्किल है। यहां लोग पूरी तरह से घरों में कैद हैं।

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