कोरोना महामारी के दौरान रेलवे को संगठित तरीके से लूटने वाले उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों के खिलाफ जांच कब

जांच के दौरान मिले गड़बड़ी के संकेत
सौ से ज्यादा टीटीई के ऊपर लटकी जांच की तलवार
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। कोरोना महामारी के दौरान रेलवे को संगठित तरीके से लूटने वाले उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अब तक नहीं हुई । इसे लेकर तमाम किस्म के सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ अफसरों पर भी जांच में फंसे कर्मचारियों को बचाने का आरोप लगातार लग रहा है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा को हटाए जाने के बाद अब यह भी पूछा जा रहा है कि क्या प्रयागराज डिवीजन के सीनियर डीसीएम के खिलाफ भी रेलवे बोर्ड इस मामले में कोई कार्रवाई करेगा या नहीं। प्रयागराज मंडल में पूर्व में तैनात सीआईटी लाइन ड्यूटी के नाम पर टीटीई से पांच से बीस हजार रूपए लेकर मन माफी काम करा रहे थे। इनमें से अधिकांश कर्मचारी ड्यूटी ही नहीं किए। उन कर्मचारियों का फर्जी हस्ताक्षर रोस्टर पर कराया गया। जांच के दौरान 15 टीटीई ड्यूटी से नदारद मिले थे। वरिष्ठ अधिकारी ने उनको अनुपस्थित किया तो पांडे ने रोस्टर पर सफेदा लगाकर फर्जी हस्ताक्षर करा दिया। रोस्टर की जांच के दौरान तमाम अनियमितताएं मिली है । इनकी जांच भी विजिलेंस कर रही है। जांच शिकायत की जांच कई बिंदुओं पर की जा रही है । पैसे के लेन-देन और फर्जी हाजिरी देकर सभी कर्मियों ने सीआईटी लाइन को चेक और ऑन लाइन भुगतान किया है । करीब तीस ऐसे कर्मचारी हैं। जिनकी नियम विरुद्ध प्रतिदिन ड्यूटी एक ही गाड़ी में लगाई जाती है। कर्मचारियों ने सीआईटी लाइन के सिविल लाइन स्थित इलाहाबाद बैंक में पैसा जमा किया है। विजिलेंस की टीम कर्मियों की सीडीआर, बैंक स्टेटमेंट ,ड्यूटी लॉबी और अधिकांश कर्मचारी बिहार, दिल्ली, राजस्थान के साथ अन्य स्थानों पर रहे है।
प्रयागराज मंडल में ये है शामिल
प्रयागराज मंडल में सीआईटी लाइन सुरेंद्र कुमार पांडेय के नेतृत्व में ड्यूटी रोस्टर में गड़बड़ी की गई । सीआईटी इरशाद अहमद, शहंशाह ,शकील अहमद, जे एन सिंह, सरिता श्रीवास्तव, कृष्णा शर्मा, ज्योति सक्सेना,पुष्पलता जैसवार, पूनम सिंह, रूपाली घोष, अजय कुमार, मसरूर अहमद, एके सिंह ,राकेश रंजन, सचिन कनौजिया, कमरुल इसलाम, मो. अकमल सिद्दीकी, अजहर अब्बास, अनुबंधिता उपाध्याय, अभिषेक कुमार, अशोक तिवारी आर के यादव, के सी गौड़, अनुराग कपूर, अरविंद कुमार ,पीपी पांडे, सुरेश सिंह, हरिशंकर शर्मा, मनीष वर्मा, मनोज श्रीवास्तव, सहित दो सौ अधिक टीटीई की ड्यूटी के दौरान मोबाइल लोकेशन की जांच की जाए तो ट्रेन के बजाय अन्य स्थानों पर मिलेंगे । टीटीई सीआईटी लाइन के खाते में और नगद घूस देकर ड्यूटी रोस्टर पर हस्ताक्षर किए हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा को हटा दिया था। उनकी जगह जोन में ही कार्यरत शैलेन्द्र कपिल को विभागाध्यक्ष के रूप में तैनाती दी गई। इस फेरबदल के पीछे संतोष उपाध्याय की शिकायत को ही प्रमुख कारण माना गया है। संतोष ने प्रयागराज मंडल में रोस्टर समेत कई किस्म की गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। उनकी 10 शिकायतों में अधिकांश सही पाई गई। आरोप था कि मामले के दोषियों को वरिष्ठ अफसरों का संरक्षण मिलता था। सवाल उठ रहा है कि पीसीसीएम के हटने के बाद दोषी मिले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का दबाव अब किसका है? क्या प्रयागराज मंडल के सीनियर डीसीएम भी कर्मचारियों को बचाने में जुटे हैं? यदि नहीं तो पीसीसीएम के दबाव में की गई अनुचित तैनाती वाले कर्मचारियों को हटाकर व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? यदि वह भी कार्रवाई नहीं करेंगे तो क्या रेलवे बोर्ड या उत्तर मध्य रेलवे के नवनियुक्त पीसीसीएम शैलेंद्र कपिल प्रयागराज डिवीजन में नए सीनियर डीसीएम की तैनाती कर जांच प्रक्रिया में तेजी लाएंगे?



