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कोरांव विधानसभा सीट पर आदिवासी वोटर करेगा निर्णय

भाजपा को सीधे देगी सपा टक्कर

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। प्रयागराज जिले की मेजा विधानसभा से 2007 में अलग होकर एक सीट अस्तित्व में आई, जिसका नाम है कोरांव। वर्ष 2012 में बसपा से राजबली जैसल 44,755 वोट पाकर विजयी हुए। 2017 में भाजपा से राजमणि कोल ने रिकार्ड 1,00,427 मत पाकर भाजपा का झंडा लहराया। कोरांव विधानसभा सीट पर आदिवासी वोटर की बहुलता है। इस आदिवासी बाहुल्य इलाके में 2017 में पहली बार कमल खिला, जिसे बरकरार रखने की चुनौती है। कोरांव विधानसभा में 2017 में 3,28,755 मतदाता थे। इस वर्ष 2022 में 21,814 मतदाता बढ़ कर 3,50,569 हो गये हैं। पिछले चुनाव में बीजेपी ने साफ-सुथरी छवि के राजमणि कोल को उम्मीदवार बनाया था और इस सीट पर पहली बार कमल खिला था। 2022 के चुनाव में ये सीट इसलिए महत्वपूर्ण होगी। क्योंकि पहली बार जीती भारतीय जनता पार्टी की कोशिश इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने की है, तो वहीं अन्य दल भी इस सीट पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
इस इलाके को कभी वामपंथी इलाका भी माना जाता रहा है। सीपीएम के राम कृपाल इस विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। पिछले चुनाव में यानी 2017 के चुनाव में राम कृपाल को कांग्रेस ने मैदान में उतारा था लेकिन वे हार गए थे। बहुजन समाज पार्टी ने भी दो बार विधायक रहे राजबली जैसल को टिकट दिया था लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले में बाजी बीजेपी के राजमणि कोल के हाथ लगी। बीजेपी ने 2017 के चुनाव में कोल और दलित वोटरों को खींचने के लिए सादगी से रहने वाले राजमणि कोल को अपना उमीदवार बनाया था।
राजमणि कोल को 1 लाख 3 हजार 428 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस के राम कृपाल को 53696 वोट के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। रामकृपाल को 46731 वोट मिले थे। बीएसपी के टिकट पर चुनावी रणभूमि में उतरे पूर्व विधायक राजबली जैसल को 26056 वोट के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। कोरांव की इस सीट से 13 प्रत्याशी मैदान में थे। 2017 के चुनाव में कोरांव सीट पर 64 फीसदी वोटिंग हुई थी। 2007 में मेजा से अलग अस्तित्व में आए कोरांव विधानसभा क्षेत्र में बीएसपी और कम्युनिस्ट पार्टी का दबदबा रहा है। पहाड़ी और मैदानी इलाके वाले इस कृषि प्रधान क्षेत्र में धान और गेहूं की फसल ज्यादा होती है। सिचाई के लिए पानी की भी समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है। वोटर यहां पार्टी और प्रत्याशी देख वोट करते हैं और अपने विकास के बारे में सोच कर मतदान करते हैं। कोरावं विधानसभा क्षेत्र में करीब साढ़े तीन लाख वोटर हैं। इनमें से 1 लाख 89 हजार 998 के करीब पुरुष और 1 लाख 59 हजार 250 के करीब महिला वोटर हैं। यहां एक लाख के आसपास आदिवासी एवं 60 हजार मतदाता पिछड़ी जाति से हैं। इस इलाके में कोल बिरादरी के लोगों की तादाद अधिक है जो मजदूरी व खेती किसानी करते हैं।

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