चुनाव परवान चढ़ते ही खुशी दुबे के मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा पर हुए हमलावर

प्रताड़ना के आरोप सही मिलने पर पुलिस कर्मियों को हो सकती है 10 साल सजा
( अनुराग शुक्ला ) कानपुर( अनुराग दर्शन समाचार )। चुनाव परवान चढ़ते ही बिकरु कांड की सह अभियुक्त और 2 दिन की नाबालिग दुल्हन खुशी दुबे का मुद्दा चुनावी बनता जा रहा है। सभी पार्टियां अब इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने में लग गई है। सबसे पहले इस मुद्दे को कांग्रेस ने उठाया, फिर बसपा ने इसको पकड़ने की कोशिश की और अब इस मुद्दे पर सपा आरपार के मूड में दिख रही है। आपको बता दे कि 10 जनवरी को खुशी दुबे ने कानपुर देहात की पॉस्को कोर्ट में चार दिन पुलिस कर्मियों द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है और मुकद्दमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग की है। इस पूरे मसले पर अब पास्को कोर्ट को एफआईआर दर्ज करने को लेकर निर्णय लेना है। उधर खुशी दुबे के वकील शिवकांत का दावा है कि उनके पास इस संदर्भ में पर्याप्त सबूत है। वह सिद्ध कर देंगे कि बिकरुकाण्ड के बाद पुलिस ने बदले की भावना के तहत खुशी सहित चार महिलाओ को 5 दिन थाने में रखने के बाद जेल भेजा है।
*खुशी के मुद्दे पर घिरती भाजपा*
खुशी दुबे के मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियां भाजपा पर हमलावर हो गयी है। बिकरुकाण्ड के बाद सबसे पहले इस मुद्दे पर कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णन ने मामला उठाया था। प्रियंका गांधी ने भी इस मामले पर पार्टी के जिम्मेदारों से रिपोर्ट ली थी। उसके बाद बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने खुशी के मुक़द्दमे को लड़ने का प्रस्ताव रखा था। उसके बाद अब सपा इसे चुनावी पोस्टर में ले आई है। पोस्टर में खुशी को जेल और माफिया धनञ्जय सिंह की गिरफ्तारी नही करने को मुद्दा बना रही है। इतना ही नही सपा सरकार में मंत्री रहे तेज नारायण पांडेय ने तो यह कह दिया कि यदि सपा की सरकार बनी तो महीने भीतर खुशी दुबे जेल से बाहर होगी। उनका दावा है कि यह बात उनके नेता अखिलेश यादव ने कहीं है।
*भाजपाई भी खुल कर आये विरोध में*
खुशी के मुद्दे को लेकर भाजपा के भीतर और बाहर भी विद्रोह देखने को मिल रहा है। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के सह संयोजक दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने तो अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है और अब खुलकर सोशल मीडिया पर बयान बाजी कर रहे हैं बल्कि भाजपा की सरकार ना बन पाए इसके लिए अभियान भी छेड़ दिया है। वही क़ई जनप्रतिनिधि से लेकर पधाधिकारी भी इस मुद्दे पर दबी जुबान से चर्चा शुरू कर चुके है।
*बचाव की मुद्रा में भाजपा*
खुशी दुबे के मुद्दे पर भाजपा के शीर्ष नेता और पदाधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई ने इस मुद्दे पर माना है कि पार्टी को एक बार सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए था। शुरू से ही इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों से लेकर मुख्यमंत्री तक ने सफाई में यही कहा है,कि मामला कोर्ट में लंबित है। यदि खुशी निर्दोष हुयी तो न्यायालय से छूट जाएगी।
*दोष सिद्ध होने पर हो सकती है 10 साल तक की सजा*
घटना के वक़्त खुशी दुबे के नाबालिग होने के कारण बिकरुकाण्ड में उसकी सुनवाई कानपुर देहात के पॉस्को कोर्ट में चल रहा है। खुशी की शिकायत के बाद खुशी के अधिवक्ता शिवकांत दीक्षित का दावा है कि थाने में नाबालिग लड़की को रखना और 4 महिलाओं को 4 दिन तक रखना अपरहण से बड़ा अपराध है। दोष सिद्ध होने पर इस मामले में दोषियों पर 7 से 10 साल तक की सजा हो सकती है। शिवाकांत ने दावा किया है कि उनके पास इसको लेकर पर्याप्त सुबूत भी हैं।



