रोस्टर प्रकरण के मुख्य आरोपी सीआईटी को एक वर्ष के लिए ग्रेड-पे 4600 से ग्रेड-पे 4200 में पदावनत
सुनियोजित लूट’ वाले भ्रष्टाचार के गंभीर प्रकरण को हल्के में निस्तारित का आरोप
रेलवे अफसर मामले को छिपाने का कर रहे है का
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के वाणिज्य विभाग में हुए पोस्टर घोटाले की जांच और उसके बाद कार्रवाई की हड़बड़ी पर भ्रष्टाचार होने की आशंका जताई जा रही है। शिकायतकर्ता को अंधेरे में रखकर की पूरी जांच मुकम्मल होने के पहले ही प्रमुख आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर देने से प्रयागराज मंडल के सीनियर डीसीएम कटघरे में खड़े होते दिख रहे हैं। इस घोटाले की कड़ियां रेलवे परिसर के बाहर भी जुड़ती हैं लेकिन रेलवे ने न खुद इसकी पड़ताल की और न ही किसी बाहरी एजेंसी को जांच के लिए लिखा। हालत ये है कि शिकायतकर्ता का ही मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज डिवीजन में हुए रोस्टर घोटाले का मामला जगजाहिर है। स्थानीय मीडिया में यह मामला खूब सुर्खियों में रह चुका है। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के सामने भी यह उठ चुका है। महाप्रबंधक की भी जानकारी में है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक व वरिष्ठतम आईआरटीएस अफसर एमएन ओझा को इस मामले को ही ध्यान में रखकर रेल मंत्रालय ने पैदल कर दिया गया है। वह बिना पद के पिछले 11 दिनों घर बैठे हुए हैं। प्रकरण के मुख्य आरोपी सीआईटी एसके पांडे को एक वर्ष के लिए ग्रेड-पे 4600 से ग्रेड-पे 4200 में पदावनत कर ‘सुनियोजित लूट’ वाले भ्रष्टाचार के गंभीर प्रकरण को हल्के में निस्तारित कर देने का आरोप लग रहा है।
बचाव में ऐसे-ऐसे कुतर्क खड़े किए गए हैं, जो पहली ही नजर में धराशायी हो जाते हैं। शिकायतकर्ता संतोष उपाध्याय का आरोप है कि इस मामले में मुख्य आरोपी एसके पांडे के खाते में लेनदेन का मामला सीधे तौर पर उजागर हो चुका है। 12 कर्मचारियों ने एसके पांडे के खाते में फंड जमा किया। इसके पुख्ता सुबूत हैं। कर्मचारियों से अकाउंट टू अकाउंट फंड ट्रांसफर हुआ है। फिर, एसके पांडे के खाते से किन-किन लोगों के पासउ पैसा गया? इसकी अब तक कोई पड़ताल नहीं की गई। यही नहीं सिविल लाइन में स्थित एक जनरल स्टोर के खाते में भी पैसा भेजे जाने और जनरल स्टोर से ही कुछ अफसरों को पैसा और सामान की सप्लाई होने के आरोपों की भी कोई जांच नहीं की गई। सूत्र बताते हैं रेलवे की इस लूट की घटना के इस मामले में बीच की 2 कड़ियां छोड़ देने से कई अफसर सीधे तौर पर बच निकलते हैं। साथ ही पूरी जांच प्रक्रिया ही भ्रष्टाचार की शिकार होती दिखती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि एसके पांडे के खिलाफ की गई कार्रवाई से भी रेलवे प्रशासन ने उन्हें अवगत नहीं कराया है, जबकि शिकायतकर्ता होने के नाते रेलवे प्रशासन को इस मामले में अब तक की गई जांच और कार्रवाई से भी उन्हें अवगत कराना चाहिए था। जानकारी के अनुसार हाजिरी रोस्टर पर जगह-जगह सफेदा लगाना भी गंभीर अनियमितताओं में शामिल है। जांच में रोस्टर रजिस्टर पर क्रास, सफेदा आदि से 33 कर्मचारी लाभान्वित हुए हैं। लाभान्वित कर्मचारियों को रेल अफसरों ने न्यूनतम दंड दिए बिना बगैर कार्रवाई के ही छोड़ दिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि स्टेशन पर सीनियर डीसीएम की सहमति के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं है। वजह, वही सीधे तौर पर कर्मचारियों को दिशा-निर्देश जारी करते हैं। उनके ही द्वारा दोषियों को न सिर्फ पदस्थापित किया गया था, बल्कि हड़बड़ी में अधूरी जांच के बाद भी एकतरफा कार्रवाई की गई है। जांच और कार्रवाई को जानना उनका वैधानिक अधिकार है, लेकिन रेलवे अफसर छिपाने का काम कर रहे हैं।



