जादू का जादू कायम,आज भी सिर चढ़ कर बोलता है जादूगर के करतब

ओमिक्रोन से बचने और मतदान हर हाल में करने को प्रेरित कर रहे जादूगर सिकंदर
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। इंटरनेट क्रांति ने मंनोरंजन के रंग रूप स्वरूप से लेकर दृश्य परिदृश्य तो बदले ही कई लोक कलाओं के लिए अस्तित्व के संकट भी उत्पन्न कर दिए। कभी मनोरंजन के लोकप्रिय साधन सिनेमा हुआ करता था, टिकट खिड़की पर लंबी लबी लाइन,क्या क्रेज होता था।आज बहुत से सिनेमा घर तो बंद ही हो गए और अभी 9 सिनेमा हॉल और एक पीवीआर चल रहे हैं पर वहां दर्शको की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक होती है। लेकिन इस 4 जी टेक्नोलॉजी और मोबाईल के मुफ्त मनोरंजन के दौर में भारत की अनुपम सांस्कृतिक धरोहर जादू जैसी कला का जलवा आज भी कायम है।बड़े बड़े फिल्मी सितारों की फिल्मे एक दो सप्ताह में ही हॉल में उतर जाती है पर भारतीय सितारा जादूगर के शो महीना डेढ़ महीना तक दर्शको को टिकट खिड़की तक खींच कर यह साबित कर रही की जादू का जादू आज भी कायम है। जादू वास्तव में भारत की प्राचीनतम 64 कलाओं में एक श्रेष्ठ लोकरंजन प्रदान करने वाली लोक कला है। गांव देहात के चौक चौराहों से गुजरते हुए विश्व रंगमंच की गरिमा बनी यह कला आज जादूगर सिकंदर जेसे जादूगरों के लिए समाज सेवा और समाज में जागरुकता लाने का भी सशक्त माध्यम बन गया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का संदेश हो या कोविड टीकाकरण को गति देने वाला संदेश, देश भक्ति की भावना को बल देने वाला संदेश हो या नशा से बर्बाद हो रही जिंदगी को बचाने के लिए नशा से दूरी बनाने का संदेश, लोकतंत्र को बचाए अपना मतदान अवश्य करे जैसे संदेश जादूगर जादू द्वारा मनोरंजन करते करते बेहद खूबसूरती और प्रभावशाली तरीके से दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। आज जब बहुत सी फिल्मों को हम सपरिवार नही देख सकते,वही जादूगर सिकंदर जेसे जादू सितारा के शो का आनंद पूरे परिवार के साथ ले सकते हैं यही मुख्य कारण है कि लोग सिनेमा हॉल की तरफ कम और जादू शो की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं। आज मोबाइल कम्प्यूटर के स्क्रीन पर मुफ्त के मनोरंजन का अंबार भले हो पर लोग आज भी जादू करतबों को लाइव अपनी नजरों के सामने घटित होते देखने का चश्मदीद बन एक जीवन भर के लिए के लिए एक जादुई यादें सहेज लेना चाहते हैं और यह भी एक कारण है कि दर्शक मैजिक शो के बॉक्स ऑफिस तक खींचे चले आते हैं।
*चंद्रलोक सिनेमा और चंद्रलोक कचौरी पूरे देश में चर्चित*
चंद्रलोक सिनेमा कभी हुआ करता था शहर का आकर्षण।
शहर की हृदय स्थली मे चंद्रलोक सिनेमा । शहर के पुराने लोग तो जानते ही हैं,आज की पीढ़ी भी चंद्रलोक चौराहा को जानती है। यहां एक कचौड़ी की दुकान भी उसी नाम से प्रसिद्ध है। यही पर पर धूम मचा रहे भारत की प्राचीनतम ललित कला के कलाकार जो आज फिल्म स्टार्स को भी बॉक्स ऑफिस पर मात दे रहे। हां, जादूगर सिकंदर
*▪️पूरे माह छाए रहे युवा सुपरस्टार सिकंदर*
छाए रहे जादूगर सिकंदर पिछले तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय से शहर से देहात तक हर तरफ जादूगर सिकंदर और उनकी जादुई करतबो चर्चा हो रही। मधुर मुस्कान के साथ तिलिस्मी करतबो को दिखा कर उन्होंने कला प्रेमी दर्शको को अपने सम्मोहन पाश मे बांध कर खूब आनंदित किया। शो में बेहद संतुलित बोलना पर जादू के माध्यम से जनसंदेश देना, सिकंदर की हर अदा पर दर्शक फिदा। फिलहाल शहर जादूमय है आपके इंद्रजाल शो से। जादू शो की रंगीनियां अब शहर से विदा लेने की तरफ बढ़ रही है, कुछ ही दिन और अपना प्रदर्शन करने के बाद वे अपने विशाल जादुई टीम के साथ अन्य राज्य के लिए चले जायेंगे। फिलहाल उनका शो जारी है ।
*कला, साहित्य और राजनीति की धुरी प्रयागराज*
तीर्थ राज प्रयाग कला साहित्य और राजनीति के लिए विख्यात है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी यहां से राजनीति के सफ़र शुरू करने वालो मे रहे। सदी के महानायक की भूमि से मदन भारती की ग्राउंड रिपोर्ट कला जगत के लिए निराश करने वाला है। महा नगर के पी वी आर और सिविल लाइंस के पैलेस सिनेमा में दर्शको के शतक लग रहें, चाहे फिल्म अल्लू अर्जून की हो या किसी और की, स्टार वर्ल्ड सिनेमा मुट्ठी गंज में भी दर्शको की संख्या कम रही आज। बाकी में दिन भर मे सौ दर्शक नही। सभी सिनेमा हॉल और जादूगर सिकंदर शो मे कोविड प्रोटोकॉल का पालन जिम्मेदारी के साथ किए जा रहे।
कोविड काल में उपजे तनाव को दूर करना प्रार्थमिकता- जादूगर सिकंदर
प्रयागराज । जादूगर सिकंदर ने बताया कि जादू तनाव को दूर करने वाली कला है, दिमागी टॉनिक है।हम दर्जन भर कलाकार अपनी पूरी ऊर्जा झोंक देते की लोगो को दो साल से बार बार मिल रहे तनाव को दूर करे और कोविड के दौर मे भी सहजता से, प्रोटोकॉल के हिसाब से जीना सीख कर इस महामारी पर विजय पा सके।




