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मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक थे स्वामी रामानंदाचार्य-हिटलर बाबा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। रामानंद जयंती की पूर्व संध्या पर महामंडलेश्वर माधवदास उर्फ हिटलर बाबा ने बताया स्वामी रामानंद ऐसे अद्भुत गुरु थे, जिन्होंने जातियों और वर्गों के खेमों में बंटे भारतीय समाज में उद्घोष किया -जात-पांत पूछे नहीं कोई, हरि को भजे से हरि का होई। यही कारण है कि संत कबीर की भक्ति संवेदना में गुरु रामानंद का स्थान गोविंद से भी बड़ा है। महामंडलेश्वर माधव दास हिटलर बाबा ने बताया कबीर जब कभी स्वामी रामानंद को याद करते हैं तो वे उनका नाम बड़े गौरव और श्रद्धा से लेते हैं – कहै कबीर दुविधा मिटी गुरु मिल्या रामानंद। सत्रहवीं सदी में हुए इतिहासकार मुहसिन फनी ने अपनी पुस्तक दबिस्तां-ए-मजाहिब में लिखा है कि कबीर जन्म से मुसलमान थे पर वे स्वामी रामानंद के शिष्य बनना चाहते थे क्योंकि रामानंद राम को जानते थे।



