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काल्विन में नहीं हुए टिटवैग इंजेक्शन इस्तेमाल,500 वायल इंजेक्शन एक्सपायरी

एक्सपायर होने से पहले इंजेक्शन कहां खपाए इसे लेकर अस्पताल प्रशासन जद्दोजहद में जुटा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मोतीलाल नेहरू (कॉल्विन) अस्पताल में बिना जरूरत आए 37 लाख के इंजेक्शन जैसे-तैसे वापस हुए। अब इंजेक्शन को लेकर एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। टिटनेस मरीजों को लगने वाले मोतीलाल नेहरू (कॉल्विन) अस्पताल में बिना जरूरत आए 37 लाख के इंजेक्शन जैसे-तैसे वापस हुए। अब इंजेक्शन को लेकर एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। टिटनेस मरीजों को लगने वाले टिटवैग इंजेक्शन काफी तादाद में अस्पताल में रखे खराब हो रहे हैं। कोरोना महामारी की वजह से अस्पताल में न तो इसके मरीज भर्ती हुए न ही उपचार हो रहा था। ऐसे में टिटवैग इंजेक्शन इस्तेमाल नहीं हुए। जून महीने में 500 वायल इंजेक्शन की एक्सपायरी है। एक्सपायर होने से पहले इंजेक्शन कहां खपाए जाएं इसे लेकर गुरुवार को अस्पताल प्रशासन जद्दोजहद में जुटा रहा। शहर के तमाम सरकारी अस्पतालों में बात की गई, ताकि इंजेक्शनों का इस्तेमाल वहां हो सके। सभी ने इंजेक्शन लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अचानक वह इतने इंजेक्शन क्या करेंगे। सीएमओ से संपर्क कर इंजेक्शन कहीं भेजने की बात कही गई लेकिन बात नहीं बनी। अस्पताल प्रशासन अब सप्लाई करने वाली कंपनी से संपर्क कर कोई रास्ता निकालने की तैयारी में है। हालांकि माना यही जा रहा है कि यह इंजेक्शन अब एक्सपायर हो जाएंगे।
टिटवैग इंजेक्शन टिटनेस से बचाव के लिए लगाया जाता है। कुत्ता काटने पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इससे संबंधित मरीज कॉल्विन अस्पताल में बड़ी संख्या में आते रहे हैं। यही वजह है कि इस अस्पताल में टिटवैग इंजेक्शन काफी संख्या में मंगाया जाता रहा है। कोरोना काल में मरीज अस्पताल में नहीं आए। ओपीडी बंद थी। ऐसे में इंजेक्शन का इस्तेमाल हो नहीं सका।काफी तादाद में अस्पताल में रखे खराब हो रहे हैं। कोरोना महामारी की वजह से अस्पताल में न तो इसके मरीज भर्ती हुए न ही उपचार हो रहा था। ऐसे में टिटवैग इंजेक्शन इस्तेमाल नहीं हुए। जून महीने में 500 वायल इंजेक्शन की एक्सपायरी है। एक्सपायर होने से पहले इंजेक्शन कहां खपाए जाएं इसे लेकर गुरुवार को अस्पताल प्रशासन जद्दोजहद में जुटा रहा। शहर के तमाम सरकारी अस्पतालों में बात की गई।ताकि इंजेक्शनों का इस्तेमाल वहां हो सके। सभी ने इंजेक्शन लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अचानक वह इतने इंजेक्शन क्या करेंगे। सीएमओ से संपर्क कर इंजेक्शन कहीं भेजने की बात कही गई लेकिन बात नहीं बनी। अस्पताल प्रशासन अब सप्लाई करने वाली कंपनी से संपर्क कर कोई रास्ता निकालने की तैयारी में है। हालांकि माना यही जा रहा है कि यह इंजेक्शन अब एक्सपायर हो जाएंगे। टिटवैग इंजेक्शन टिटनेस से बचाव के लिए लगाया जाता है। कुत्ता काटने पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इससे संबंधित मरीज कॉल्विन अस्पताल में बड़ी संख्या में आते रहे हैं। यही वजह है कि इस अस्पताल में टिटवैग इंजेक्शन काफी संख्या में मंगाया जाता रहा है। कोरोना काल में मरीज अस्पताल में नहीं आए। ओपीडी बंद थी, ऐसे में इंजेक्शन का इस्तेमाल हो नहीं सका।

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