जो व्यक्ति प्रयाग में एक महीना, इंद्रियों को वश में करके कल्पवास करता है, उसके लिए स्वर्ग का स्थान सुरक्षित हो जाता है- शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज माघ मेला क्षेत्र में श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के पण्डाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन सत्र में कहा कि जो भी व्यक्ति प्रयाग में एक महीना, इंद्रियों को वश में करके स्नान-ध्यान और कल्पवास करता है, उसके लिए स्वर्ग का स्थान सुरक्षित हो जाता है। अनेक पौराणिक आख्यानों के अनुसार प्रयाग को तीर्थराज के रूप में महिमामण्डित किया गया है। प्रयाग तीर्थों के नायक हैं, तीर्थों के राजा हैं, और मोक्ष देने वाली सातों पुरियां उनकी रानियां हैं। इनमें पटरानी का गौरव काशी को प्राप्त है। काशी तीर्थराज को सबसे ज्यादा प्रिय है। प्रयाग ने उन्हें मुक्ति देने का अबाध और अनन्त अधिकार सौंप रखा है। कहा गया है- “मुक्तिदाने नियुक्ता”। वे मुक्ति देने के लिए नियुक्त की गई हैं। पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि महाभारत के एक प्रसंग में मार्कंडेय ऋषि धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं कि राजन् प्रयाग तीर्थ सब पापों को नाश करने वाला है। जो भी व्यक्ति प्रयाग में एक महीना, इंद्रियों को वश में करके स्नान-ध्यान और कल्पवास करता है, उसके लिए स्वर्ग का स्थान सुरक्षित हो जाता है। अनेक पौराणिक आख्यानों के अनुसार प्रयाग को तीर्थराज के रूप में महिमामण्डित किया गया है। इस नगरी को विभिन्न नामों से जाना जाता हैं | संगमनगरी, कुम्भनगरी, तम्बूनगरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस पवित्र नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्रीहरि विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ अपने वेणीमाधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विद्यमान हैं जिन्हें द्वादश माधव के नाम से जाना जाता है |



