दिगंबर जैन मंदिर में 5 जुलाई सेआठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू

( विनय मिश्रा )प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार ) । दिगंबर जैन पंचायती सभा के तत्वाधान में जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में 5 जुलाई दिन मंगलवार सेआठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू हुआ। जैन परंपरा में पूजा, उपासना का विशेष महत्व है। इनमें से सिद्धचक्र महामंडल विधान की और भी अधिक महिमा है। जिनालय में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने केसरिया वस्त्रो एवं मुकुट- माला पहनकर बढ़-चढ़कर भाग लिया।सबसे पहले भगवान की शांतिधारा एवंअभिषेक किया गया। इसके बाद पंडित सुनील जैन के निर्देशन एवं आचार्य विज्ञान भूषण के सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान की मंत्रोच्चार एवं भक्ति भाव के साथ संगीत की धुनों पर आराधना प्रारंभ हुई। सिद्धचक्र विधान के बारे में पंडित सुनील जैन ने बताया कि प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32 इस प्रकार से बढ़ते क्रम में इस धार्मिक अनुष्ठान में कुल 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाते हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान 13 जुलाई तक चलेगा। आचार्य विज्ञान भूषण महाराज ने बताया कि यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जो हमारी जीवन के समस्त पाप, ताप और संताप को नष्ट कर देता है। इनमें कई प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें कई प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है। जो हमारे सभी मनोरथों को पूर्ण करती है। जैन दर्शन में अष्टनिका महापर्व का विशेष महत्त्व बतलाया गया है।
जैन महिला मंडल की बाला जैन ने बताया कि फाल्गुन, कार्तिक और आषाढ़ के अंतिम आठ दिन अष्टमी से पूर्णिमा तक यह पर्व आता है। इन आठ दिनों में सिद्धों की यह विशेष आराधना के लिए सिद्धचक्र विधान किया जाता है।
कल दिन रविवार को आचार्य 108 विपुल सागर जी महाराज का ससंघ ज़ीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर प्रयागराज में आगमन हो रहा है ।महाराज जी का चतुर्मास् तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली अंन्दावा मे होना निश्चित हुआ है।



