प्रोन्नति से वंचित पीएसी दरोगाओं ने न्याय की हाईकोर्ट में न्याय की गुहार, सरकार को नोटिस जारी

इलाहाबाद। उप्र पुलिस मुख्यालय द्वारा अनियमित रूप से किये गए 5000 इंस्पेक्टर पद स्वीकृति से पीड़ित एवम प्रोन्नति से वंचित पीएसी दरोगाओं ने न्याय की गुहार करते हुए लखनऊ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

दरअसल होली के अवसर पर उप्र पुलिस में इंस्पेक्टर के 5000 पद स्वीकृत करते हुए सिविल पोलिस के लगभग 2200 दरोगाओं को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन दिया गया है, जिसमे 2007 बैच तक के दरोगा इंस्पेक्टर बन गए जबकि इसके विपरीत पीएसी में 2005 बैच के दरोगा प्रमोशन नही पा सके है। इस विसंगति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है।
याचिका की सुनवाई करते हुए लखनऊ हाईकोर्ट ने कल सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को निर्देश दिये है, तथा किये गए 2200 प्रमोशन को इस पेटिशन में होने वाले निर्णय के अधीन रखने का निर्देश दिया है।
याचीगणों के अधिवक्ता सुधीर कुमार मिश्र ने बताया कि उप्र सिविल पुलिस एवम सशस्त्र पुलिस की अलग अलग नियमावली 2008 में बनाई गई है जिसका संशोधन 2015 में किया गया है।
इस नियमावली में स्पस्ट रूप से इंस्पेक्टर पद का बटवारा किया गया है।नियमावली में कही भी डीएफ और नान डीएफ के रूप में पद का बटवारा नही किया गया है, जबकि पुलिस मुख्यालय द्वारा 5000 स्वीकृत पद का विभाजन 3500 इंस्पेक्टर डीएफ और 1500 पद नान डीएफ के रूप में करते हुए सभी 5000 पद नागरिक पोलिस के दरोगाओं को प्रमोशन देकर भर दिया गया।
पीएसी के दरोगाओं को इस 5000 पद के सापेक्ष सम्मिलित नही किया गया है जिसके कारण वे इंस्पेक्टर बनने से वंचित हो गए है जबकि यह 5000 पद उप्र पुलिस के सभी शाखाओं के लिए स्वीकृत किये गए है।इस प्रकार अपने ही बैच के सब इंस्पेक्टर से यह लोग जूनियर हो गए तथा पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए होने वाली डीपीसी में यह अपने साथ व अपने से जूनियर भर्ती दरोगा के साथ सम्मिलित नही हो पाएंगे। बल्कि सूत्रों की माने तो यह लोग कभी डीप्टी एसपी बन ही नही पाएंगे।सुधीर मिश्र के अनुसार स्वीकृत 5000 पदों में से नान डीएफ के लिए स्वीकृत 1500 पदों पर प्रोन्नति पाने के लिए पीएसी दरोगा हकदार है,जिनको प्रमोशन न देकर पोलिस मुख्यालय ने इन पीएसी दरोगाओं का कैरियर खराब कर दिया है।
प्रमोशन से वंचित पीएसी दरोगाओं में घोर निराशा फैल गयी है,इनमे से ज्यादातर दरोगा अतिविशिष्ट महानुभावो की सुरक्षा ड्यूटी,पीएसी से कानून व्यवस्था ड्यूटी व ट्रैफिक पुलिस में कार्य कर रहे है जिनमे निराशा फैलने से इनकी गुणवत्ता एवं मनोदशा पर प्रतिकूलअसर पड़ेगा।




