दमकल युद्ध से हुआ दारागंज की होली की पहचान

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दारागंज की होली की पहचान दमकल युद्ध में हुआ रंग युद्ध लगभग 100 वर्षों से भी ज्यादा प्राचीन दारागंज के ऐतिहासिक दमकल युद्ध में दारागंज में 2 दिन जमकर रंगों की बरसात हुई। जिसमें दर्जनों दमकल एक दूसरे के सामने तैनात थे ।
और विभिन्न रंगों के माध्यम से एक दूसरे से टक्कर ले रहे थे, सर्वप्रथम धकाधक चौराहे से, प्रयागराज सेवा समिति एवं धकाधक संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष दमकल योद्धा धर्मराज पाण्डेय के नेतृत्व में, दमकल योद्धा शंकर जी शर्मा, शिव जी शर्मा, पंडित भक्तराज पाण्डेय कन्हैया शर्मा, पंडित पुष्प राज पांडे, विशाल शर्मा, मोहित शर्मा, योगराज शास्त्री, कन्हैया श्रीवास्तव, प्रभु राज पांडे, शाश्वत त्रिपाठी के नेतृत्व में जयकारा लगाते घंटा घड़ियाल शंख की धुन पर भगवान वेणी माधव मंदिर पहुंचे जहां, अपने दमकल से पहले रंग की बरसात भगवान माधव के चरण पर करके उसके पश्चात बाबा भंडार पहुंची। जहां सुभाष वैश्य दिनेश जी पिंटू शुक्ला के द्वारा सभी दमकल योद्धा होलिया रे का अबीर गुलाल लगाकर स्वागत किया, तत्पश्चात आमने सामने बुलडोजर बाबा, मोदी जी ,रूस के राष्ट्रपति पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति जलेश की, दारा सिंह, अमिताभ बच्चन, गंगूबाई ,खली आदि के दमकल आमने सामने सजे, संयोजक तीर्थराज पाण्डेय बच्चा भैया के सीटी बजाने से युद्ध की शुरुआत होती है। फिर जमकर एक दूसरे से रंगों का युद्ध लड़ा जाता है ।
अंत में मध्य दारागंज स्थित धकाधक चौराहे पर होली यारों की बरात पहुंचती है। जहां अशोक चौरसिया, राजू गुप्ता, विनोद गुप्ता, भैया जी द्वारा सभी का स्वागत सत्कार किया गया। दोनों तरफ दर्जनों सागर सजे थे ,जिसमें एक तरफ केवड़ा जल एक तरफ गुलाब जल से सुगंधित रंगों को भरा गया था। फिर सभी दमकल योद्धा अपने-अपने दमकल मे रंगों को लोड करते हैं। फिर सामने आमने योद्धा जो चश्मा ढा टा ,ईयर कैप लगाकर युद्ध के लिए तैयार होते हैं।
जैसे ही शंख घंटा घड़ियाल बसता है। घनघोर युद्ध शुरू हो जाता है। जिसमें युद्ध में भाग लेने वाला हर आदमी रंग और खुशियों से भर जाता है। और सभी लोग अंत में एक दूसरे से गले मिलते हैं ।अबीर गुलाल लगाते हैं ,संयोजक तीर्थराज पाण्डेय बच्चा भैया ने कहा कि प्रयागराज के इस प्राचीन दमकल युद्ध को हमारे जिन प्राचीन दमकल योद्धाओं ने शुरू किया था, हम उनको नमन करते हैं।
और विश्व शांति की कामना करते हैं। उसके साथ रूस और यूक्रेन के युद्ध में मारे गए निर्दोष नागरिकों की आत्मा की शांति हेतु मां गंगा से आराधना पूजन कर इस वर्ष के दमकल युद्ध का समापन किया जाता है। और सभी दमकल योद्धा अपने अपने निर्धारित मार्ग से पुनः अगले वर्ष मिलने के वादे के साथ वापस लौट जाते हैं।


