Latest

महागौरी की उपासना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। भगवती ने जब पार्वती रूप में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की, तब कठोर तप के कारण उनकी देह सीण और वर्ण काना पड़ गया। अंत में तपस्या से संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने अपनी जाटा से निकलती पवित्र गंगाधारा का जल ऊन पर डाला तो वे विद्युत प्रभा के समान अनिकांतिमान और गौर वर्ण की हो गड़ी तभी से मां के इस रूप का नाम महागौरी पड़ा। नवरात्रि के आठवें दिन सुख-संपन्नता प्रदातामा महागौरी की उपासना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मार्ग से भटका हुआ व्यक्ति भी सन्मार्ग
पर आ जाता है। मां भगवती का यह शक्ति विग्रह भक्तों को अमोघ फल देता है। भविष्य में पाप-संताप, निर्धनता, दीनता और दुख भक्त के पास नहीं फटकते। मां महागौरी की कृपा से साधक सभी प्रकार से पवित्र व अक्षय पुण्य और अलौकिक सिद्धियां प्राप्त करता है। माता महागौरी का अतिसौंदर्यवान, शांत करुणामयी स्वरूप सबको प्रगति के लिए आशीर्वाद प्रदान करता है
और भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा करता है,
ताकि वह जीवनपथ पर आगे बढ़ सके। नवरात्रों के आठवें दिन कंद, फूल, चंद्र अथवा श्वेत शंख जैसे निर्मल गौर वर्ण वानी महागौरी का ध्यान-पूजन किया जाता है। इनके सभी वस्त्राभूषण और यहां तक कि इनका वाहन भी हिम के समान सफेद या गौर रंग वाला वृषभ यानी बैल माना गया है। इनकी चार भुजाएं हैं। इनमें ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वर मुद्रा रहती है। माता महागौरी मनुष्य की प्रवृत्ति सत की ओर प्रेरित करके असत का विनाश करती हैं। माता महागौरी की उपासना से भक्त को अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती हैं।

Related Articles

Back to top button