Latestदेशमध्यप्रदेशहाेम

मध्य प्रदेश में 35 सीटों पर असर डाल सकता है हार्दिक फैक्टर !

इंदौर।  उज्जैन में किसानों के मंच से इलेक्शन कैंपेन का आगाज़ कर चुके ये नेता, भाजपा के ख़िलाफ बिगुल बजा रहे हैं. किसान, बेरोज़गारी, व्यापम घोटाले और देश के संविधान को बचाने की बात कर रहे हैं.वे घोषित तौर पर कांग्रेस के मंच पर नहीं हैं. उनकी सभाएं किसान क्रांति सेना जैसे संगठन आयोजित कर रहे हैं. लेकिन कांग्रेस के कई पाटीदार पटेल नेता उनके साथ जुड़े हैं. खास तौर पर वे जो टिकटों के दावेदार हैं. ये नेता हार्दिक और जिग्नेश की सभाओं में सुविधाएं जुटा रहे हैं, भीड़ का प्रबंध कर रहे हैं. उनके साथ मंच तक साझा कर रहे हैं.

स्टार कैंपेनर
मध्यप्रदेश में हार्दिक पटेल की पहचान उस स्टार कैंपेनर के बतौर हो रही है, जो कांग्रेस में तो नहीं हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सबसे करीबी हैं. वे तमाम नेता जो टिकटों की लाइन में हैं, हार्दिक के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाने में लगे हैं. खास तौर पर पाटीदार- पटेल समाज के लोग जिनका खासा दबदबा कांग्रेस की राजनीति में है.

60 लाख पाटीदार
गुजरात के बाद मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है जहां पाटीदार समाज का बड़ा वोट बैंक है. 60 लाख के करीब पाटीदार वोट प्रदेश की 34 सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं. मध्यप्रदेश के मालवा इलाके में सबसे ज़्यादा, 35 लाख से ज़्यादा पाटीदार वोट हैं. लेकिन कांग्रेस से सिर्फ दो और भाजपा से 11 पाटीदार विधायक हैं. मंदसौर किसान गोलीकांड के बाद शिवराज सिंह ने अपनी कैबिनेट में पाटीदार नेताओं को जगह दी. लेकिन भावांतर,कर्ज़माफी की घोषणा के बाद भी प्रदेश का किसान खुश नहीं दिख रहा है. इसने पाटीदारों को हार्दिक पटेल के आंदोलन के साथ लामबंद होने की गुंजाइश छोड़ दी है.

किसानों में चेतना
इलेक्शन कैंपेन के दौरान न्यूज 18 हिंदी से विशेष बातचीत करते हुए हार्दिक पटेल ने दावा किया कि वे मध्यप्रदेश में किसानों के बीच चेतना लाने का प्रयास कर रहे हैं. खेती- किसानी की हालत बहुत खराब है. जब पाटीदार आंदोलन शुरू हुआ तब हमें पता नहीं था कि हम आरक्षण की मांग क्यों कर रहे हैं. लेकिन आज जब देख रहे हैं कि किसान परेशान है. खेती नहीं कर पा रहा है , लागत नहीं निकाल पा रहा है. सरकार की नीतियां उसके खिलाफ हैं. तब हमें आरक्षण मांगने की ज़रूरत पड़ी.

लीडर नहीं निडर चाहिए
हार्दिक कहते हैं कि उनका आंदोलन मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा के खिलाफ है. हम सत्ता में जो है उसके खिलाफ हैं. एक अघोषित इमरजेंसी का दौर चल रहा है. हमें इन हालातों में लीडर नहीं निडर पैदा करने हैं. जो अपनी बात कह सकें तकलीफ खुलकर कह सकें.

वे किसी को टिकट नहीं दिलवाते
हार्दिक इस बात से साफ इंकार करते हैं कि कांग्रेस की राजनीति में उनकी कोई सीधी दखल है. वे न तो किसी को टिकट दिलवा रहे हैं और ना ही किसी की सिफारिश कर रहे हैं. जो लोग उनके साथ घूम रहे हैं उनके लिए वे कभी टिकट की बात कांग्रेस अध्यक्ष से नहीं कर रहें. कांग्रेस द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों को लेकर हार्दिक का कहना है कि वे तो किसानों, बेरोजगारों की बात कर रहे हैं. इस मुद्दे पर कोई भी उनके साथ हो सकता है.

किसान-बेरोज़गार मुद्दा
हार्दिक का दावा है इस बार मतदाता बहुत मुखर हैं और अपने अधिकारों के लिए सजग हैं. 2018 और 2019 का चुनाव किसान और बेरोजगारा युवा ही तय करेंगे. हार्दिक की मध्यप्रदेश में अगले एक महीने में लगातार सभाएं हैं. खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों पर उनका फोकस है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button